मुरादाबाद। टीएमयू में दशलक्षण महापर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग धर्म श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भाव के साथ मनाया गया। यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में पद्मपुराण आधारित भव्य जैन रामायण की नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों से रूबरू कराया। प्रस्तुति में भगवान राम के वैराग्य और जैन दीक्षा की ओर अग्रसर होने के प्रसंग को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रीजी के अभिषेक और शांतिधारा से हुई। शुभम, सूर्यांश, शिवांश और लक्ष्य जैन को स्वर्ण कलश से अभिषेक का सौभाग्य मिला। सम्यक जैन ने स्वर्ण झारी से शांतिधारा की। सीसीएसआईटी के फैकल्टी सदस्य डॉ. आदित्य जैन ने रजत झारी से शांतिधारा कर धर्मलाभ लिया। छात्र ऋतिक जैन ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया।
पंडित ऋषभ शास्त्री के सानिध्य में नवदेवता पूजा, सोलहकारण पूजा और दस लक्षण पूजा विधि-विधान से संपन्न हुई। जैन फैकल्टी की ओर से जिनालय से श्रीजी की आरती रिद्धि-सिद्धि भवन लाई गई। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से आरती की।
पंडित ऋषभ शास्त्री ने उत्तम त्याग धर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि दान में दूसरे के कल्याण की भावना होती है, जबकि त्याग में बिना अपेक्षा वस्तु और मोह का परित्याग किया जाता है। इस दौरान सीता स्वयंवर से लक्ष्मण-रावण युद्ध तक मंचन किया गया। इस मौके पर टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, प्रथम महिला वीना जैन, समूह उपाध्यक्ष मनीष जैन, ऋचा जैन, कार्यकारी निदेशक अक्षत जैन, जाह्नवी जैन, नंदनी जैन आदि मौजूद रहे।