रामपुर जिले की मिलक, अमरोहा की धनौरा और बिजनौर की नहटौर विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई। इन सीटों पर तीन बार चुनाव हो चुके हैं। नहटौर पर सपा को अभी तक एक बार भी जीत नहीं मिली है। जबकि धनौरा और मिलक में लगातार दो चुनाव से पार्टी को हार का सामना करना पड़ रहा है। वहीं चंदौसी सीट पर आखिरी बार सपा ने 2012 में जीत दर्ज की थी।
मंडल की इकलौती नगीना सुरक्षित सीट है जिसपर सपा सुरक्षित है। इस सीट पर पार्टी लगातार तीन बार से जीत दर्ज कर रही है। बाकी चार सीटें पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
2027 के चुनाव में सपा इन चार सीटों पर भाजपा की काट ढूंढने में लगी है। इसके लिए पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) को धार देने में जुटी है। इन आरक्षित सीटों पर मुस्लिमों के साथ-साथ पिछड़ों को जोड़ने में लगी है।
आरक्षित सीटों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की नजर है। पार्टी स्तर पर इन सीटों के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। एससी के साथ-साथ दूसरी बिरादरियों को भी जोड़ा जा रहा है। - जयवीर यादव, सपा जिलाध्यक्ष
मंडल की पांच आरक्षित सीटों पर सपा की स्थिति
| विधानसभा सीट |
सपा की स्थिति |
| नहटौर |
03 चुनाव हुए, तीनों में हार |
| मिलक |
2012 में मिली थी जीत |
| चंदौसी |
2012 में मिली थी जीत |
| धनौरा |
2012 में मिली थी जीत |
| नगीना |
लगातार तीन बार मिल रही जीत |
2022 में सपा ने मंडल में किस वर्ग से कितने प्रत्याशी उतारे थे
| वर्ग |
संख्या |
जीत मिली |
| मुस्लिम |
13 |
11 |
| ओबीसी |
08 |
05 |
| एससी |
04 |
01 |
नोट : बिजनौर और नहटौर से रालोद के उम्मीदवार मैदान में थे।
मंडल की चार आरक्षित समेत दस सीटों पर दो बार से हार
मुरादाबाद मंडल की 27 में से 10 सीटें ऐसी हैं जहां सपा को लगातार दो चुनावों में हार का सामना करना पड़ रहा है। इसमें चार आरक्षित सीटों के अलावा मुरादाबाद नगर, बिलासपुर, हसनपुर, बिजनौर, बढ़ापुर, धामपुर विधानसभा सीट शामिल हैं। बिजनौर सीट पर अभी तक सपा को जीत नहीं मिली है। वहीं बिलासपुर सीट पर पार्टी को आखिरी बार 2002 में जीत मिली थी।