70 से 80 फीसदी पढ़े-लिखे लोग साइबर ठगी के शिकार
साइबर ठगों का शिकार होने वालों में 70 से 80 फीसदी पढ़े-लिखे लोग शामिल हैं। इनमें डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर, आईपीएस और सेवा निवृत्त आईएएस, सिपाही, दरोगा, इंस्पेक्टर समेत अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हैं। कम पढ़े-लिखे और अनपढ़ लोग नेट बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने से बचते हैं। ऐसे में वो ठगी का शिकार भी कम भी हुए।
30 लाख रकम ही हो सकी वापस
जिले में साइबर सेल और साइबर अपराध थाने में स्टाफ की तैनाती है। टीमें साइबर अपराध की घटनाओं पर काम भी कर रही हैं। ठगी में शामिल लोग भी पकड़े गए, लेकिन अभी तक रकम बहुत कम ही वापस हो सकी है। इस साल अब तक 30 लाख रुपये ही वापस हो सके हैं।
साइबर अपराधी बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ या फिर विदेश में बैठकर ठगी कर रहे हैं। एक खाते से रकम निकालकर दूसरे खाते में ट्रांसफर कर देते हैं। इसे बाद कई अन्य खातों में रकम को बांट दिया जाता है।
इन तरीकों से हो रही साइबर ठगी
- डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी
- व्हाट्सएप डीपी पर परिचित का फोटो लगाकर रकम ट्रांसफर करवाना।
- फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर इमोशनल मैसेज भेजकर साइबर ठगी।
- बिजली बिल ठीक कराने का झांसा देकर ओटीपी पूछ कर साइबर ठगी।
- एयरपोर्ट पर पार्सल पकड़े जाने का डर दिखाकर साइबर ठगी।
- सोशल मीडिया पर फोटो वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ठगी।
हमारी टीम लगातार साइबर अपराधियों पर कार्रवाई कर रही हैं। कई बड़े गैंग पकड़े गए हैं। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वह अनजान नंबर से आने वाली कॉल के झांसे में आकर अपने खाते, ओटीपी और अन्य जानकारियां साझा न करें। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी क्राइम