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UP: 'मैं गृह सचिव बोल रहा हूं...', एक फोन आया और फिर खुशी का ठिकाना नहीं; पिता बेचते थे चना और करते थे मजदूरी

Mon, 26 Jan 2026 01:17 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

From Labour to Padma shri Award: राष्ट्रपति के हाथों शिल्प गुरु चिरंजी लाल यादव को पद्म श्री अवॉर्ड की जानकारी मिलने के बाद खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शिल्प गुरु चिरंजी लाल यादव ने बताया कि राज्य दक्षता पुरस्कार के रूप में उन्हें पहला अवॉर्ड 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने दिया था।
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मुरादाबाद में चिरंजी लाल यादव को मिठाई खिलाते परिजन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मैं केंद्रीय मंत्रालय का गृह सचिव बोल रहा हूं। आपका नाम चिरंजी लाल यादव है। आपका चयन पद्म श्री अवॉर्ड के लिए हो गया है। पहले तो यकीन नहीं हो रहा था फिर खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पद्म श्री अवॉर्ड की जानकारी मिलने के बाद चिरंजी लाल यादव के कुछ ऐसे ही जज्बात रहे। 

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गृह सचिव के फोन के बाद चिरंजी लाल के परिवार में खुशी का माहौल है। रविवार को बधाई देने के लिए शहर के गणमान्य लोग उनके घर पहुंचे। कटरा पूरनजाट जीवन की सराय के रहने वाले चिरंजी लाल यादव बताते हैं कि वह रविवार की सुबह दस बजे वह चार पी रहे थे।

इस बीच केंद्रीय मंत्रालय के गृह सचिव की कॉल आई। उन्होंने अपना परिचय देते हुए पहले मेरा नाम पूछा। इसके बाद सवाल किया कि आपने अवॉर्ड के लिए आवेदन किया था। इसके बाद गृह सचिव ने कहा कि आपका पद्म श्री अवॉर्ड के लिए चयन हो गया है लेकिन उस समय विश्वास नहीं हो रहा था।

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दोपहर दो बजे वह खाना खाकर बैठे थे। इस बीच लोगों के कॉल आने लगे कि आपका नाम पद्मश्री सूची में आ गया है। टीवी पर भी खबर चलने लगी तो पक्का भरोसा हो गया कि अब अवॉर्ड मिलेगा। इसके बाद खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिचित और अधिकारियों की भी बधाइयां मिलने का तांता शुरू हो गया।

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से मिला पहला पुरस्कार
शिल्प गुरु चिरंजी लाल यादव ने बताया कि राज्य दक्षता पुरस्कार के रूप में उन्हें पहला अवॉर्ड 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने दिया था। इसके बाद 1994, 1995, 1998 और 1999 में राज्य दक्षता पुरस्कार मिले। 

2008 में उन्हें नेशनल मेरिट अवॉर्ड और 2019 में शिल्प गुरु का अवॉर्ड भी मिला। इच्छा थी कि हस्तशिल्प नक्काशी के काम में पद्म श्री अवॉर्ड मिले। इसके लिए 2023 से आवेदन करना शुरू किया। आज भगवान की वजह से वर्षों की मनोकामना पूरी हो गई।

पिता चना बेचते थे, अमर सिंह ने हुनर के सांचे में ढाला
शिल्प गुरु चिरंजी लाल यादव ने बताया कि उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। पिता स्व. फग्गन लाल यादव चना बेचते थे और मजदूरी करते थे। सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अजीविका चलाने के लिए पीतल पर नक्काशी का काम सीखना शुरू कर दिया। 

उस समय गुरु अमर सिंह ने नक्काशी का हुनर सिखाया। उन्होंने पीतलनगरी के असली हुनर के सांचे में ढाला। गुरु को वह कभी भूल नहीं सकते हैं। उन्होंने मेहराव वर्क, वर्मा बिदर वर्क, पंचरंगा वर्क, अंगूरी बर्क, फाइन वर्क, मरोड़ी वर्क का काम भी किया। सबसे ज्यादा बारीक काम मरोड़ी का होता है।

विदेशों में किया कला का प्रदर्शन
शिल्प गुरु अपनी कला का प्रदर्शन केंद्र सरकार की पहल पर 2015 में जर्मनी के फ्रैंकफुर्त में किया। इसके पहले 2010 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका और मलेशिया में गए थे। देश के विभिन्न स्थानों नई दिल्ली प्रगति मैदान ताल कटोरा, नेशनल क्राफ्ट म्यूज़ियम, कला ग्राम चंडीगढ़, चेन्नई वैलुवर कोट्टम, चेन्नई पुंपविहार, अहमदाबाद गांधी नगर, हैदराबाद शिल्पारामम में अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
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वर्तमान में वह अपने पीतल के आइटम की सप्लाई भी करते हैं। कोलकाता, दिल्ली हाट, सूरज कुंड इंटरनेशन मेला और हैदराबाद शिल्पा रामम इंटरनेशनल मेले में भाग लिया।
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