ग्रामीणों के शोर मचाने पर तेंदुआ महिला को छोड़कर गन्ने के खेत में भाग गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। विरमो देवी अन्य महिलाओं के साथ खेत में चारा काट रही थीं। सभी महिलाएं अलग-अलग स्थानों पर चारा काट रही थीं। इसी दौरान गन्ने के खेत में छिपे तेंदुए ने अचानक विरमो देवी पर झपट्टा मार दिया।
हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उनकी चीख सुनकर साथ गई महिलाएं और आसपास खेतों में काम कर रहे किसान मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए तेंदुए का पीछा किया, लेकिन वह गन्ने के खेत में भाग गया। महिला की मौत की खबर गांव में फैलते ही ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा।
मौके पर पहुंची वन विभाग और पुलिस की टीम का ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया। आक्रोशित ग्रामीणों ने टीम पर पथराव कर दिया। इससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लगातार हमलों के बावजूद तेंदुए को पकड़ने के लिए प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए।
15 दिन में दूसरी महिला की मौत
बलिया की घटना से क्षेत्र में तेंदुए की दहशत और बढ़ गई है। करीब 15 दिन पहले लालापुर पीपलसाना गांव में भी तेंदुए ने संतोष देवी पर हमला कर उनकी जान ले ली थी। अब दूसरी महिला की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करने वाले किसान, महिलाएं और बच्चे लगातार खतरे के बीच हैं।
ग्रामीणों ने तेंदुए को जल्द पकड़ने और क्षेत्र में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे हमलों के बाद अब केवल निगरानी और आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि तेंदुए को पकड़ने के लिए तत्काल निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।