यूपी की इस विधानसभा सीट का उपचुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बना है। सीएम योगी कल संगठन के लोगों में जोश भरेंगे। टिकट के दावेदारों की भागदौड़ तेज हो गई है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन सपा और भाजपा की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भाजपा नेताओं ने अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो सितंबर को मुरादाबाद के आर्यभट्ट इंटरनेशनल स्कूल में बेरोजगारों को नियुक्तिपत्र देने के साथ ही जनसभा को भी संबोधित करेंगे। पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर जीत का मंत्र भी देंगे।
भाजपा नेता रामवीर सिंह और दिनेश सिंह कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए लखनऊ गए थे। दोनों नेता कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव में टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं। लोग इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। इसी प्रकार अन्य नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
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आरएलडी को सीट देने की भी अटकलें
भाजपा के एक वर्ग का मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता आरएलडी के लिए भी मैदान खाली कर सकते हैं। रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव में किया गया प्रयोग मुरादाबाद में भी हो सकता है।
स्वार सीट भाजपा ने अपने सहयोगी अपना दल को दे दी थी और मुस्लिम प्रत्याशी के मैदान में उतरने से जीत मिल गई थी। भाजपा यहां भी ऐसा ही कदम उठा सकती है। आरएलडी के दो नेताओं के नाम चर्चा में आए हैं। मुरादाबाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का गृह जनपद है। इसलिए कुंदरकी उपचुनाव पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का भी सवाल है।
कुंदरकी से एक बार ही जीती भाजपा
कुंदरकी विधानसभा की सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी। इसके बाद 15 बार विधानसभा चुनाव हुए। अभी तक के राजनीतिक इतिहास में भाजपा के प्रत्याशी चंद्र विजय सिंह ने सिर्फ एक बार 1993 में जीत हासिल की थी। चंद्र विजय 18 महीने ही विधायक रहे।
इसके बाद कुंदरकी विधानसभा की सीट पर सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है। कुंदरकी सीट पर ज्यादातर मुस्लिम प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं, क्योंकि इस सीट पर करीब 65 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं।
काफी प्रयास के बाद भी नहीं मिली सफलता
भाजपा ने कुंदरकी विधानसभा के लिए पार्टी के नेता रामवीर सिंह को दो बार चुनाव लड़ाया। उन्होंने दोनों बार काफी प्रयास किया, लेकिन चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हो सके। 2022 में भाजपा ने यहां से कमल प्रजापति को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन कमल भी जीत की दहलीज से काफी दूर रहे।
यहां सपा के जियाउर्रहान बर्क ने जीत हासिल की थी। हालांकि, जियाउर्रहमान के संभल से सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। यह सीट तुर्कों का गढ़ कही जाती है। 2022 में सपा से बगावत करके बसपा का दामन थामने वाले हाजी रिजवान कुंदरकी से चार बार विधायक रहे हैं। हाजी रिजवान सपा में फिर वापस आ गए हैं।