फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: अमेरिकी टैरिफ के बाद यूरोप ने भी बढ़ाईं मुश्किलें, संकट में लकड़ी उत्पादों का कारोबार, चिंता में निर्यातक

Fri, 22 Aug 2025 02:13 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

यूरोपीय यूनियन के नए ईयूडीआर कानून से भारतीय लकड़ी हस्तशिल्प निर्यातकों पर संकट गहरा गया है। इसके तहत निर्यातकों को साबित करना होगा कि उनके उत्पाद वनों की कटाई से नहीं बने और इसकी लोकेशन भी देनी होगी। इससे मुरादाबाद, अमरोहा, सहारनपुर, जयपुर और जोधपुर के निर्यातकों को दिक्कत हो रही है। 
विज्ञापन
लकड़ी का कारोबार - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिकी टैरिफ के बाद अब निर्यातकों के सामने ईयूडीआर (यूरोपियन यूनियन डीफॉरेस्टेशन रेग्युलेशन) का संकट खड़ा हो गया है। यूरोपीय यूनियन ने इस नए कानून को लागू कर लकड़ी के उत्पाद बनाने वाले निर्यातकों को झटका दिया है। निर्यातकों को साबित करना होगा कि उनके उत्पाद वनों की कटाई कर नहीं बनाए गए हैं।

विज्ञापन


इसके लिए कटाई वाले क्षेत्र की लोकेशन भी देनी होगी। इससे मुरादाबाद, अमरोहा, सहारनपुर, जयपुर, जोधपुर के निर्यातकों को भारी परेशानी का सामना करवा पड़ रहा है। यूरोपीय देश नए उत्पादों के ऑर्डर देने से पहले ईयूडीआर की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कह रहे हैं।

इस संदर्भ में हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और पर्यटन व संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की। ईपीसीएच के अध्यक्ष नीरज खन्ना ने कहा कि भारतीय लकड़ी हस्तशिल्प निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है।
विज्ञापन


ईयूडीआर के अनुपालन की आवश्यकताएं लकड़ी हस्तशिल्प निर्यातकों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। हमारे उत्पाद मुख्यतः आम, बबूल और शीशम की लकड़ी से बनाए जाते हैं, जो कृषि वानिकी से प्राप्त होते हैं। इनमें प्राकृतिक वनों की कटाई नहीं की जाती है।

खन्ना ने कहा कि नियमों को स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना लागू किया गया तो उत्पादन में गिरावट, ऑर्डर रद्द होने और बेरोजगारी की स्थिति खड़ी हो सकती है। ईपीसीएच ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से आम, बबूल और शीशम की लकड़ी के लिए ईयूडीआर पर छूट की मांग की।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से कटाई के समय भू-स्थान डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करने की अपील की। इस मौके पर ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता, महानिदेशक राकेश कुमार, कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा समेत जयपुर, जोधपुर व सहारनपुर के निर्यातक मौजूद रहे।

1000 करोड़ के काम प्रभावित होने की आशंका 
मुरादाबाद से 75 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है। इसके बाद यूरोपीय देशों का नंबर आता है। कुल 8500 से 10 हजार करोड़ के निर्यात का 10-12 प्रतिशत हिस्सा लकड़ी उत्पादों के निर्यात से आता है। इसमें गार्डन फर्नीचर सबसे बड़ा उत्पाद हैं।

निर्यात संगठनों का कहना है कि ईयूडीआर में रियायत नहीं मिली तो मुरादाबाद में 800 से 1000 करोड़ का कारोबार प्रभावित होगा। टैरिफ के कारण पहले ही निर्यातक परेशान हैं। कारीगरों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 

ईयूडीआर पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अच्छा कदम है लेकिन इसमें कुछ संशोधन या रियायत की आवश्यकता है। हमने यूरोपीय यूनियन के सामने अपनी बात रखने के लिए सरकार से अपील की है। उम्मीद है जल्द ही हल निकलेगा। - नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच 
विज्ञापन

मुरादाबाद, अमरोहा, सहारनपुर, जयपुर, जोधपुर के व्यापारियों के लिए ईयूडीआर से कई परेशानियां उत्पन्न होने वाली हैं। समाधान के उपायों पर विमर्श करने के लिए 23 अगस्त को ईपीसीएच ने जोधपुर में बैठक आयोजित की है। हम सब वहां शामिल होंगे। - अवधेश अग्रवाल, मुख्य संयोजक, ईपीसीएच
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें