संभल के रजपुरा और जुनावई में भी बड़ी संख्या में गंगा की जमीन पर पट्टे किए गए हैं। गुन्नौर क्षेत्र के एक गांव में मामला पकड़ में आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। प्रशासन ने सभी 145 पट्टों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
संभल में गंगा की 800 बीघा से अधिक रेतीली जमीन पर पट्टों का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब रजपुरा, जुनावई और गुन्नौर में हुए पट्टे भी जांच के घेरे में आ गए हैं। कृषि के नाम पर आवंटित किए गए एक-एक पट्टे का रिकार्ड देखा जाएगा। वहीं गुन्नौर के गांव सुखैला में 2019 में जो 162 पट्टे किए गए थे इनमें 17 पट्टे 31 मार्च 2023 को निरस्त हो चुके हैं जबकि बाकी 145 को निरस्त करने की प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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संभल जनपद में रजपुरा, गुन्नौर और जुनावई में गंगा का क्षेत्र है। इन तीनों विकास खंड में हजारों बीघा में गंगा की भूमि है। पहले भी गंगा की जमीन पर कब्जों के मामले सामने आते रहे हैं। लेकिन यह पहली दफा है जब इतने बड़े पैमाने पर गंगा की जमीन से पट्टे किए गए हों। चकबंदी और राजस्व विभाग के अफसरों ने भूमि की श्रेणी तक बदल डाली।
रेतीली भूमि को कृषि योग्य बता दिया गया। 162 लोगों के नाम से पट्टे कर दिए गए। जबकि नियमानुसार गंगा की जमीन से पट्टे किए ही नहीं जा सकते हैं। जिन विभागों पर सरकारी भूमि को खुर्दबुर्द होने से बचाने की जिम्मेदारी थी उन्होंने ही गंगा की भूमि का बंदरबांट कर दिया।
खनन माफियाओं का बड़ा नेटवर्क हो सकता है उजागर
गंगा की जिस रेतीली भूमि से पट्टे किए गए हैं वहां आज भी चोरी छुपे खनन होता रहता है। माना जा रहा है कि अफसरों से मिलकर जो पट्टे किए गए हैं उनका इस्तेमाल भी खनन के लिए ही किया जाना था। क्योंकि 2019 में हुए पट्टों की जमीन का इस्तेमाल आज तक नहीं हुआ है। अगर कोई जरूरतमंद लेता तो जाहिर सी बात है कि खेती करता।
आमतौर पर रेतीली भूमि में खरबूज या तरबूज की खेती हो सकती है लेकिन मौके पर ऐसा भी कोई साक्ष्य नहीं है। इससे साफ है कि खनन माफियाओं ने खनन के लिए भूमि की श्रेणी बदलवाकर जमीन अपने नाम करवा ली।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल का कहना है कि संभल जिले में गंगा किनारे के सभी पट्टों की जांच कराई जाएगी। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी वहां सख्त कार्रवाई होगी। सत्यापन के लिए टीमें गठित की जा रही हैं।
खनन माफिया और अफसरों की जुगलबंदी से खड़ा हुआ भ्रष्टाचार का महल
संभल की गुन्नौर तहसील क्षेत्र में 850 बीघा (71.5500 हेक्टेयर) सरकारी जमीन को अवैध पट्टों से खुर्दबुर्द करने के पीछे खनन का खेल था। जमीन खनन माफिया और अफसरों की जुगलबंदी से गंगा किनारे न सिर्फ भ्रष्टाचार का बड़ा महल खड़ा किया गया बल्कि 18 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन दूसरों के नाम कर दी।
साल 2013 में हुई इस मनमानी का राजफाश होने के बाद बर्खास्त एसडीएम, सहायक चकबंदी अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, पूर्व प्रधान समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गुन्नौर के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में सुल्तानपुर में तैनात एसडीएम करम सिंह चौहान समेत 13 आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है। इनमें शामिल चकबंदी और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि सभी अवैध पट्टों को निरस्त किया जाएगा।
जून 2019 में गुन्नौर तहसील के गैर आबाद गांव सुखैला हल्का क्षेत्र भौना नंगला के अंतर्गत गंगा के किनारे की जमीन पर चकबंदी विभाग की मिलीभगत से गंगा की रेतीली जमीन पर 162 पट्टे कर दिए गए थे। नियमों को दरकिनार करके की गई इस मनमानी में ग्राम पंचायत असदपुर के तत्कालीन प्रधान विक्रांत और भू प्रबंध समिति के सदस्यों का भी हाथ था।
जानकार बताते हैं कि इस रेतीली भूमि पर उपजाऊ मिट्टी की तरह फसलें पैदा नहीं की जा सकतीं। इस खेल के पीछे असल मकसद का अवैध खनन का था। किसानों के नाम पट्टे की आड़ में जमीन से माफिया को बेरोकटोक खनन की छूट देना मकसद था। इसी मकसद को पूरा करने के लिए गंगा किनारे की जमीन में पैदा होने वाली खरबूजे-तरबूज जैसी फसलें भी नहीं की गईं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे खेल में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत चली, हालांकि आधिकारिक स्तर से अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
विभागीय लोग बताते हैं कि जमीन खुर्दबुर्द करने के इस खेल में कुल 162 पट्टे किए गए। 31 मार्च 2023 में 17 पट्टे निरस्त किए गए थे। अभी रिकॉर्ड में 145 पट्टे हैं। गुन्नौर के सब रजिस्ट्रार के मुताबिक सर्किल रेट के हिसाब से प्रश्नगत जमीन की दर 24 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित है। पट्टों से जुड़ी कुल 71.5500 हेक्टेयर (800 बीघा से ज्यादा) जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 18 करोड़ रुपये बनता है। ग्राम पंचायत असदपुर की मौजूदा प्रधान पिंकी यादव बताती हैं कि लंबे समय से इस जमीन का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा, जो खनन के लिए इसे खाली रखने का संकेत है।
तीन करोड़ से ज्यादा की रिश्वत का खेल
ग्राम पंचायत असदपुर की ग्राम प्रधान पिंकी यादव के पिता मनवीर सिंह का कहना है कि वर्ष 2019 में पट्टे आवंटित होने के दौरान किसानों व ग्रामीणों को पट्टे दिलाने के नाम पर खूब अवैध वसूली हुई थी। उनका मानना है कि तत्कालीन अफसरों, कर्मचारियों ने तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली की थी। उन्होंने बताया कि कई को पट्टे की जमीन पर कब्जे नहीं दिलाए गए। कुछ समय बाद 135 किसानों से वसूली करके उन्हें भी पट्टे दिलाने का भरोसा दिया गया।