संचारी रोग नियंत्रण में मंडल में मुरादाबाद सबसे पीछे रह गया। यूनिसेफ की सर्वे रिपोर्ट में फगिंग, नाला सफाई, एंटी लार्वा स्प्रे और जलभराव दूर करने में जिला फिसड्डी साबित हुआ। संचारी रोग से लड़ने में मुरादाबाद में किसी भी मोर्चे पर साै फीसदी काम नहीं हुआ है।
जबकि जिले में संचारी रोग को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। यूनिसेफ की सर्वे रिपोर्ट में अप्रैल 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि फॉगिंग से लेकर एंटी लार्वा छिड़काव तक, नालों की सफाई से लेकर जलभराव के निस्तारण तक हर पैरामीटर पर मुरादाबाद राज्य के औसत से नीचे है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात शहरी क्षेत्र में फॉगिंग की है, जहां मुरादाबाद का औसत महज 80 प्रतिशत है, जबकि संभल ने 100 प्रतिशत का आंकड़ा छू लिया। एंटी लार्वा स्प्रे में भी मुरादाबाद 82 प्रतिशत पर अटका है, जबकि बिजनौर और संभल 100 प्रतिशत पर हैं।
यानि जहां दूसरे जिले पूरी तैयारी का दावा कर रहे हैं, वहीं मुरादाबाद में मच्छरों के खिलाफ जंग अधूरी है। नालों की सफाई और जलभराव हटाने जैसे बुनियादी कामों में भी मुरादाबाद पीछे है। नालों की सफाई 91 प्रतिशत और जलभराव हटाने में 88 प्रतिशत ही काम हुआ है, जो राज्य के औसत से कम है।
यह सीधे तौर पर डेंगू, मलेरिया और इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है। इन आंकड़ों के मुताबिक संचारी रोगों के खिलाफ जंग में मुरादाबाद की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो बरसात के मौसम में हालात बिगड़ना तय है।
एडी हेल्थ डॉ. आशु अग्रवाल का कहना है कि विभिन्न विभाग इस कार्यक्रम में मिलकर कार्य करते हैं। स्वास्थ्य विभाग अपनी ओर से लगातार सुधार कर रहा है।