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रेलवे के सरकारी आवासों पर अनाधिकृत लोगों ने जमाया कब्जा

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रेलवे के सरकारी आवासों में अनाधिकृत लोगो का कब्जा। - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। रेलवे हरथला कालोनी में रेल कर्मियों के लिए बने सरकारी आवासों मेें अनाधिकृत लोगों ने कब्जा जमा रखा है। हालांकि आरपीएफ और इंजीनियरिंग विभाग की टीम रेलवे की कालोनियों में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें ध्वस्त कर रही है, लेकिन इन मकानों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि अनाधिकृत रूप से रह रहे लोग इन मकानों में बिजली, पानी जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं का लाभ ले रहें।
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चूंकि एसएसई या पूल होल्डर की अनुमति के बिना बिजली कनेक्शन मिलना नामुमकिन है। ऐसे में यह प्रश्न भी खड़ा होता है कि कहीं कर्मचारियों द्वारा इन मकानों का किराया तो नहीं वसूला जा रहा। रेलवे हरथला कालोनी में 35 से अधिक मकानों में कुछ परिवार अवैध रूप से रह रहे हैं। कालोनी में रहने वाले रेल कर्मियों के परिवारों का कहना है कि इन लोगों को रेलवे की टीम कई बार यहां से हटा चुकी है, लेकिन कुछ दिन बाद ये अनाधिकृत लोग फिर से कब्जा जमा लेते हैं। ऐसे में आस पास के लोग भी परेशान हैं। पिछले दिनों रेलवे बोर्ड से जारी आदेश के अनुसार मंडल के अधिकारियों को उन कर्मचारियों की सूची बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जो आवंटित मकानों में नहीं रहते हैं या उनका किराया वसूल रहे हैं, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। दूसरी ओर रेल कर्मचारी संगठन उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन का कहना है कि इस मामले की जांच के लिए उन्होंने रेल प्रशासन से अपील की है।
रेलवे के सरकारी आवासों में अनाधिकृत लोग बहुत समय से रह रहे हैं। नवंबर 2019 में हुई पीएनएम मीटिंग में यूनियन ने यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद एईएन ने एसएसई ईस्ट और वेस्ट कालोनियों के पूल होल्डर्स को आवासों से संबंधित ब्यौरा लेकर बैठक में आने को कहा लेकिन कोई भी पूल होल्डर मकानों का ब्यौरा लेकर शामिल नहीं हुआ। इन मकानों का किराया वसूला जा रहा है। यूनियन रेल प्रशासन से इस विषय पर पुन: अपील करेगी। - शलभ सिंह, मंडल मंत्री उरमू
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आरपीएफ व इंजीनियरिंग विभाग की टीम द्वारा संयुक्त रूप से आवासों को कब्जा मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अक्तूबर माह तक 500 से अधिक मकानों को कब्जा मुक्त कराया जा चुका है। जो कर्मचारी आवासों का दुरुपयोग कर रहे हैं उनकी सूची उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। कुछ पूल होल्डर्स जांच के दायरे में हैं। - पीके शर्मा, एडीईएन उत्तर रेलवे
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