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वातावरण में कम हुई धूल, खतरा अभी बरकरार

Fri, 15 Jun 2018 02:06 AM IST
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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प्रदूषण - फोटो : demo pic
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शहरवासियों को कुदरत को दोहरा कहर झेलना पड़ रहा है। एक तरफ वातावरण में धूल की परत छाई हुई है तो दूसरी तरफ उमस और गर्मी से बेचैनी बढ़ रही है। नवंबर 2017 की दमघोंटू धुंध के बाद एक बार फिर  से शहर धूल की परत की चपेट में आ गया। बुधवार की अपेक्षा गुरुवार को धूल कुछ छंट गई, लेकिन वायु गुणवत्ता सूचकांक में अभी भी प्रदूषण खतरे से ऊपर है। 
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बुधवार को मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 485 प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था।  गुरुवार को घटकर 412 प्रति घन मीटर हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण की स्थिति किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को बीमार करने के लिहाज से अभी भी खतरनाक है। 
दो दिनों से वातावरण में छाई धूल की परत लोगों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। गुरुवार दोपहर में धूल छंटने के बाद हल्की धूप निकली लेकिन हवा में अभी भी पीएम 10 का स्तर 509 है।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आर के सिंह का कहना है कि मौसम में आ रहे बदलाव और हवा का दबाव कम होने की वजह से वायु मंडल में पीएम-10 ठहर गए हैं। यह धूल के भारी कण हैं। गर्मियों में जब भी धूल की परत जमती है तो वह बारिश से ही दूर होती है। तेज हवाओं से राहत मिल जाती है लेकिन उसमें भी धूल की मात्रा अधिक होती है। एक्यूआई का स्तर 200 से अधिक होने पर सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है।  

वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. नितिन बत्रा का कहना है कि यह वातावरण सामान्य व्यक्ति को भी बीमार बना सकता है। जिसकी वजह से आंखों में जलन, सांस की बीमारी से लेकर हाइपरटेंशन, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा के मरीज को ज्यादा धूप में नहीं घूमना चाहिए, और लगातार दवा खाएं। सांस का अटैक होने पर भर्ती होने की जरूरत पड़ जाती है। मॉस्क लगाने से भी बहुत ज्यादा फायदा नहीं होगा। 
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