पहले जिला अस्पताल ले गए, वहां हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने हायर सेंटर रेफर करने के लिए कहा। परिजन मरीज को लेकर दिल्ली रोड स्थित अस्पताल में ले गए। वहां भी निराशा मिली तो कांठ रोड के अस्पताल में दिखाया, डॉक्टरों ने यहां भी जवाब दे दिया। इसके बाद कांठ रोड पर ही दूसरे अस्पताल में गए। वहां डॉक्टरों ने मरीज विशेष को आईसीयू में भर्ती कर लिया। जबकि जतिन को काशीपुर रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विशेष के चाचा पंकज ने बताया कि भतीजा मजदूरी करता है। हाईटेंशन लाइन उनके घर से बिल्कुल ऊपर से गुजर रही है। दोपहर में छत पर किसी काम से गया था, तब ही करंट लग गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आसपास के क्षेत्र में पहले हाईटेंशन लाइन नहीं थी। क्षेत्र में मकान बनने के बाद हाईटेंशन लाइन डाली गई हैं। करंट के कारण विशेष के दोनों हाथ काम नहीं कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना हैै कि वह 50 प्रतिशत तक जल चुका है। ग्रामिणों ने हादसे की जिम्मेदारी विद्युत निगम के अधिकारियों की बताई है।
लोग खर्च उठाने को तैयार, निगम फिर भी नहीं हटा रहा लाइन
मालक बीजना गांव के लोगों का कहना है कि कई वर्ष पहले उनके गांव में बाढ़ आ जाती थी। इसलिए गांव में कच्चे मकान बने हुए थे। करीब 15-20 साल पहले गांव में हाईटेंशन लाइन डाली गई। उसी समय लोगों के पक्के मकान भी बन रहे थे। ग्रामिणों के पढ़ा लिखा न होने का फायदा उठाकर निगम ने लाइन डाल दी। इसके बाद 2022 से गांव की युवा पीढ़ी के लोग लाइन हटवाने के लिए निगम के अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। ग्रामीण लाइन शिफ्टिंग का खर्च वहन करने को तैयार हैं। इसके बावजूद निगम के अधिकारी ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
जेई ने एक्सईएन को नहीं दी हादसे की जानकारी
लोगों का कहना है कि वह जेई से लेकर एक्सईएन तक सबको फोन लगाते रहे लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। अधिशासी अभियंता का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वहीं विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता राजेश तोमर का कहना है कि वह मिलक बीजना गांव में टीम को भेजेंगे। मौका मुआयना कराने के बाद विद्युत व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। मरीज के परिजनों से भी घटना की जानकारी ली जाएगी।