किदवईनगर सहकारी आवास समिति में फर्जीवाड़ा का खेल उजागर
मुरादाबाद। किदवईनगर सहकारी आवास समिति में फर्जीवाड़ा कर दो लोगों ने पंडित नगला रोड स्थित करोड़ों के आठ प्लाॅटों की रजिस्ट्री कर दी। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने इस मामले में दो अधिकारियों की कमेटी बनाकर जांच कराई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। फिलहाल समिति की जमीन की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अपर आयुक्त आवास ने दोनों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
एडीएम प्रशासन को किदवईनगर सहकारी आवास समिति से जुड़े माजिद ने प्रार्थनापत्र देकर बताया कि नवंबर 2016 में समिति के सचिव शमीम अख्तर का निधन हो गया। इसके बाद समिति निष्क्रिय हो गई। इस बीच असालतपुरा निवासी सिकंदर हुसैन और रईस ने बगैर चुनाव कराए समिति के फर्जी ढंग से सचिव बन गए। इसके बाद उसने तत्कालीन आवास अधिकारी से मिलकर दोनों ने समिति के आठ प्लाटों की रजिस्ट्री कर दी। इस मामले की जानकारी मिलने पर एडीएम प्रशासन ने एडीएम वित्त एवं राजस्व सत्यम मिश्रा को जांच कराने के निर्देश दिए। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने जमीन की जांच करने के लिए 25 नवंबर 2024 को एक कमेटी गठित की, जिसमें तहसीलदार सदर और आवास अधिकारी सतीश कुमार शामिल थे। इस मामले में एडीएम वित्त ने जमीन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए उप निबंधक को पत्र भेज दिए।
आठ भूखंडों की रजिस्ट्री की गई
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि समिति के तथाकथित सचिव सिकंदर हुसैन ने नजराना परवीन पत्नी हाजी जाकिर हुसैन को एक और आयशा बेगम पत्नी फिरासत उल्लाह को दो प्लाटों की रजिस्ट्री कर दी। इसी प्रकार प्रबंध कमेटी से बगैर प्रस्ताव पास कराए मोहम्मद रईस अली ने गाटा संख्या 123 के पांच भूखंडों को गैर सदस्यों को बेच दिया। सायरा मंसूरी को भूखंड संख्या 74 की रजिस्ट्री 21 अगस्त 2024 को की गई। इसी तरह आफताब जहां पत्नी शकील अहमद को भूखंड संख्या 73 की रजिस्ट्री दो सितंबर 2024, मोहसिन अमीर पुत्र महमूद हुसैन को भूखंड संख्या 71 की रजिस्ट्री 21 अगस्त 2024 को की गई। राबिल हुसैन पुत्र हिदायतउल्लाह को भूखंड संख्या 72 की रजिस्ट्री दो सितंबर 2024 और यास्मीन मंसूरी पत्नी रजीउद्दीन मसूरी को भूखंड संख्या 75 के पक्ष में दो सितंबर 2024 को रजिस्ट्री की गई।
आरोप है कि इस मामले में समिति के वास्तविक दस्तावेजों एवं अभिलेखों में हेराफेरी कर मो. रईस अली खुद को सचिव घोषित कर दिया था। नियमानुसार समिति की संपत्ति की बिक्री के बाद उस धन को समिति के खाते में जमा करना चाहिए, लेकिन इन दोनों ने अपने खाते में धन जमा कर लिया। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में विभाग की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता है।
तत्काल रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश
उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के अपर आवास आयुक्त विनय कुमार मिश्रा ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सहकारी अधिकारी (आवास) सतीश कुमार को सिकंदर हुसैन और मो. रईस अली के खिलाफ धारा 103 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस रिपोर्ट से इस मामले में कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। बताया कि मामले में रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराने के लिए वाद दायर कराया जाएगा।