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Moradabad News: सड़कों पर प्रदूषण फैला रहे दो लाख वाहन

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मुरादाबाद। जिले के सड़कों पर दो लाख से ज्यादा वाहन ऐसे चल रहे हैं, जिनकी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की अवधि खत्म हो चुकी है। यह वाहन रोजाना प्रदूषित धुआं छोड़कर पीतलनगरी की हवा को जहरीली बना रहे हैं। फिर भी पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से इन वाहनों पर कोई सख्ती नहीं दिखाई जा रही है।
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मुरादाबाद आरटीओ कार्यालय में सात लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसमें चार पहिया, तीन पहिया और दो पहिया वाहन शामिल हैं। पंजीकृत वाहनों में बाइकों की संख्या सबसे अधिक छह लाख है। काराें की संख्या 69 हजार है। इन सात लाख वाहनों में दो लाख से अधिक वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रक प्रमाणपत्र नहीं है। जबकि प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने के लिए जिले में 65 प्रदूषण केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर छह महीन से लेकर एक साल के लिए वाहनों की पीयूसी जारी की जाती है। इसके बावजूद जिले के दो लाख से अधिक वाहन सड़कों पर बिना पीयूसी के बेखौफ दौड़ रहे हैं। इनमें 48 हजार कार शामिल हैं। परिवहन विभाग के अनुसार बिना पीयूसी के वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं है। पिछले छह महीने में परिवहन विभाग ने मात्र 273 वाहनों का प्रदूषण का चालान किया है।

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करीब पांच लाख वाहन चलने योग्य

-मुरादाबाद जिले में कुल सात लाख वाहन हैं। इसमें केवल पांच लाख वाहन चलने योग्य हैं। पिछले एक साल के भीतर 2.49 लाख वाहनों का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाया गया। परिवहन विभाग में 60 हजार नए वाहनों का भी पंजीकरण हुआ है। यह वाहन बीएस-6 के हैं।
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ऐसे की जाती है प्रदूषण की जांच

-एआरटीओ(प्रशासन) हरिओम ने बताया कि प्रदूषण जांच केंद्र पर कंप्यूटर से जुड़ा एक गैस एनालाइजर होता है। इसके साथ एक कैमरा और प्रिंटर भी होता है। वाहन को स्टार्ट करने के बाद गैस एनलाइजर को साइलेंसर में लगाया जाता है। वाहन से निकलने वाली गैस के आंकड़े कंप्यूटर में दर्ज हो जाते हैं। उनका कहना है कि मापदंड के भीतर अगर वाहन से प्रदूषण हो रहा है तो पीयूसी जारी करने का प्रावधान है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के वाहनों के लिए प्रदूषण का दायरा अलग-अलग होता है। प्रदूषण प्रमाण पत्र छह माह से लेकर एक साल के लिए बनता है।

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से 105 रुपये तक है पीयूसी की फीस

-परिवहन विभाग के अनुसार दो पहिया और चार पहिया वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र 60 रुपये से 120 रुपये में बनता है। नए वाहन खरीदने के एक साल बाद प्रदूषण प्रमाण पत्र वाहनों का बनवाया जाता है। केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं बनता है।

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प्रदूषण से कई प्रकार की होती हैं बीमारियां

-नेत्र रोग सोसायटी के सचिव व नेत्र सर्जन डॉ. प्रवीन कुमार सिंह ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। श्वसन संबंधी, हृदय संबंधी, त्वचा संबंधी रोगों से लेकर कैंसर तक के जोखिम शामिल हैं। प्रदूषण के कारण बच्चों में निमोनिया तो बड़ों में सीओपीडी के कई मामले सामने आते हैं। वायु प्रदूषण के कारण वर्षा का जल तक दूषित हो जाता है। अम्लीय वर्षा के कारण शरीर पर इनफेक्शन, दाने, छाले हो जाते हैं।

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वाहनों के धुएं से निकलता है कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड व शूट पार्टिकिल्स

- वनस्पति विज्ञान की विशेषज्ञ व पर्यावरणविद् डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि वाहनों के धुएं से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, शूट पार्टिकिल्स, पीएम-2.5 निकलता है। इससे पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसके कारण सबसे अधिक बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होती है। चौराहों पर जाम की स्थिति में आस-पास की हवा काफी दूषित हो जाती है। इससे वहां के आस-पास के लोगों के बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। पुरानी गाड़ियों के धुएं से सीसा(लेड) निकलता है। यह लोगों के लिए काफी घातक होता है।

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-छह महीने में ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण के 273 चालान किए गए हैं। विभाग की ओर से समय-समय पर वाहनों की चेकिंग की जाती है। प्रदूषण के चालान को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।- आनंद निर्मल, एआरटीओ (प्रवर्तन)
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