मुरादाबाद। वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत कराने में अब सिर्फ दो दिन शेष रह गए हैं लेकिन अभी भी जिले की 80 प्रतिशत संपत्तियों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो सका है। वेबसाइट का सर्वर न चलने और संपत्तियों के कागजात न मिल पाने की वजह से इन 80 फीसदी संपत्तियों का अबतक पंजीकरण नहीं हो पाया है। इन संपत्तियों का पांच दिसंबर तक ही पंजीकरण कराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पांच दिसंबर की समयसीमा बढ़ाए जाने की मांग को भी खारिज कर दिया है। ऐसे में शहर की इन 80 फीसदी संपत्तियों पर खतरा मंडराने लगा है।
विभागीय अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक जिले में वक्फ की तकरीबन पांच हजार संपत्तियां हैं। इनमें मस्जिद, मजार, कब्रिस्तान, मदरसे, ईदगाह और ब्याह घर जैसी संपत्तियां शामिल हैं। इनमें कई संपत्तियां सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधीन हैं जबकि कई संपत्ति पर शिया वक्फ बोर्ड का अधिकार है। आंकड़ों के मुताबिक अबतक एक हजार से भी कम संपत्ति का पंजीकरण पोर्टल पर हो पाया है। अधिकारियों के दावा है कि उन्होंने जागरूकता शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया लेकिन फिर भी आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं हो पाई।
मस्जिद के मुतवल्लियों का कहना है कि सैकड़ों वर्ष पुरानी सपंत्ति के कागजात अधिकतर लोगों के पास मौजूद नहीं हैं। वक्फ बाई यूजर के मामलों में कागजात वैसे भी मौजूद नहीं होते हैं। हालांकि सभी के रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड कार्यालय में सुरक्षित हैं लेकिन बोर्ड कार्यालयों से मदद न मिल पाने के कारण लोग अपनी संपत्तियों का पंजीकरण नहीं करा पाए हैं। अधिकतर मुतवल्लियों या जिनके नाम पर वक्फनामा है उनका निधन हो चुका है। साथ ही पोर्टल पर पंजीकरण के समय इतने कागजात मांगे गए हैं कि लोगों के पास वह मौजूद ही नहीं हैं। सरकारी कार्यालयों का चक्कर काटने और वक्फ बोर्ड के दफ्तरों तक की दौड़ लगाने के बाद भी लोगों के हाथ खाली रह जा रहे हैं।
मुतवल्लियों का कहना है कि समयसीमा को बढ़ाया जाना चाहिए और पंजीकरण कराने में कुछ कागजात पर छूट प्रदान करनी चाहिए ताकि लोगों के पास जो भी कागज मौजूद हैं वह उससे संपत्तियों का पंजीकरण करा लें। बाद में कागज मिलने पर वह उसे अपडेट कर सकें। मुतवल्ली जावेद अली, सुबहान आलम का कहना है कि वेबसाइट भी काम नहीं कर रही है। पोर्टल पर कागज अपलोड करने के बाद भी वह अपडेट नहीं हो पा रहा है।
- क्या बोले लोग
- एक सप्ताह से लगातार संपत्ति का पंजीकरण पोर्टल पर करने का प्रयास कर रहा हूं। लेकिन कागजात अपलोड ही नहीं हो पा रहे हैं। रात के समय भी वेबसाइट काम नहीं कर रही है। कई लोग परेशान हैं और इधर-उधर भटक रहे हैं लेकिन किसी की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। - शाहवेज इकबाल, वकील
- मस्जिद करीब सौ वर्ष पुरानी है। कागजात मौजूद ही नहीं हैं। जिनके पास मस्जिद के कागजात थे उनका निधन हो चुका है। तीन महीने से वक्फ बोर्ड कार्यालय और स्थानीय सरकारी कार्यालयों का चक्कर काट रहा हूं लेकिन कई दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। बिना कागज के संपत्ति का पंजीकरण भी नहीं हो रहा है और कोई सहायता करने वाला भी नहीं है। वक्फ बोर्ड कार्यालय से भी कोई मदद नहीं मिली। - मोहसिन चौधरी, मुतवल्ली
- मस्जिद की संपत्ति किसके नाम पर है, इसकी जानकारी तहसील में कई बार जाने के बावजूद नहीं मिली। वक्फ बोर्ड से भी कोई कागज नहीं मिला है। लखनऊ से लेकर स्थानीय सरकारी कार्यालयों तक की दौड़ लगा ली लेकिन कहीं से कोई कागज नहीं मिल पाए। इसी वजह से पंजीकरण नहीं करा पाया। वक्फ बोर्ड को सभी संपत्तियों के कागजात मुहैया कराने थे। - असलम आलम, मुतवल्ली
- संपत्ति का वक्फनामा तो है लेकिन खतौनी में किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज है। इसकी शिकायत जिला अल्पसंख्यक कार्यालय में की लेकिन इसके बावजूद कोई सहायता नहीं की गई। वक्फनामा मौजूद होने के बावजूद पंजीकरण नहीं कर पा रहा हूं। खतौनी में गलत नाम दर्ज होने का रिकार्ड कैसे सही हो कोई जानकारी नहीं है। - मो. अरशद, मुतवल्ली
शहर में वक्फ की तकरीबन पांच हजार संपत्ति है। अबतक 20 प्रतिशत संपत्तियों का पंजीकरण ही हुआ है। कई मोहल्लों में लोगों को जागरूक किया गया। अभी भी दो दिन शेष हैं। जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया है वह समयसीमा खत्म होने से पहले अपना पंजीकरण जरूर करा लें। - तूलिका शर्मा, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी