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Moradabad News: किसान की हत्या में दो सगे भाइयों को उम्रकैद

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मुरादाबाद। भगतपुर के 16 साल पुराने किसान की हत्या के मामले में अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। अदालत ने दो सगे भाइयों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। किसान की हत्या एक अन्य हत्या की रंजिश के चलते की गई थी। इस मामले में मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु भी हो चुकी है।
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भगतपुर थाना क्षेत्र के रामपुर बलभद्र निवासी जयप्रकाश पुत्र बाबूराम ने 6 अक्तूबर 2008 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि 6 अक्तूबर की सुबह करीब साढ़े नौ बजे उसके पिता बाबूराम, बेटा रविंद्र और भाई सत्यपाल ठाकुरद्वारा तारीख पर जा रहे थे।तब गांव के ही अली हुसैन के ईंख के खेत के पास से गुजरे थे। इसी दौरान खेत में गांव के ही उमेश, उसका भाई मनोहर और सुरेंद्र लाठी-डंडे और फरसा लेकर आ गए। उन्होंने तीनों पर हमला बोल दिया था। रविंद्र और सत्यपाल अपनी जान बचाकर भाग गए थे लेकिन वृद्ध होने के कारण बाबूराम भाग नहीं पाए थे। हमलावरों ने उन्हें पीट पीट कर मार दिया था। घटना की सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे तो आरोपी भाग गए थे। मौके पर बाबूराम की लाश पड़ी मिली थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपी हरदेव उर्फ बब्बू, मनोहर, उमेश कुमार यादव, सुरेंद्र उर्फ सुरेश पुत्र तन्नू सिंह यादव निवासी गांव रामपुर बलभद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों को बाद में जमानत मिल गई थी। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन विमल वर्मा की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव और डीके कश्यप ने बताया कि इस मामले में आरोपियों और वादी के बीच पुरानी रंजिश चल रही थी। मुकदमे के दौरान दो आरोपी जिनमें सुरेन्द्र उर्फ सुरेश और उमेश कुमार यादव की मृत्यु हो चुकी है। पत्रावली पर आए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी हरदेव उर्फ बब्बू और उसके भाई मनोहर को हत्या के आरोप में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।


हत्या की रंजिश में की थी हत्या

मुरादाबाद। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव ने बताया कि सोलह साल पहले भगतपुर क्षेत्र के रामपुर बलभद्र के रहने वृद्ध किसान की हत्या गांव की ही पुरानी रंजिश के चलते की गई थी। वादी जयप्रकाश पुत्र बाबू राम और उसके भाई महेश, सतपाल और विनोद के खिलाफ वर्ष 2007 मे हरदेव उर्फ बब्बू पुत्र दुर्गा सिंह ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें कहा था कि गांव में दोनों परिवार के बच्चों के बीच आपसी झगड़ा हो गया था। तब जय प्रकाश और इसके भाइयों ने मिलकर मेरे भाई विजय पाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसमें अदालत ने चारों भाइयों को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जिस पर जय प्रकाश और उसके भाई हाई कोर्ट से अपील पर रिहा हुए थे। इसी रंजिश के चलते इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।
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फरसे से काट दी गर्दन

मुरादाबाद। हत्या के बदले हत्या की रंजिश के चलते दोषी करार दिए गए आरोपियों ने बाबू राम की हत्या फरसे के वार से की थी। जिससे उसकी गर्दन कट गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसके सर और शरीर पर लाठी-डंडे से चोटों के निशान भी मिले थे।


अदालत ने माना जघन्य अपराध

मुरादाबाद। सोलह साल चले मुकदमे में न केवल वादी पक्ष ने अपने गवाह पेश किए बल्कि आरोपी पक्ष की ओर से भी अपने बचाव में गवाह पेश किए गए थे। जिसकी सत्यता को परखने के बाद अदालत ने अपने 37 पेज के आदेश में कहा कि दोष सिद्ध अभियुक्तगण के पक्ष में एक भी ऐसा तथ्य सामने नहीं आया जो कि अपराध के तत्व को और उसकी गंभीरता को कम कर सके। दोषियों ने बाबू राम पर फरसा और अन्य हथियारों से उसके शरीर पर चोट पहुंचाने के आशय से ही वार किया था। जिससे उसकी मौत हो गई। यह अपराध एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। पत्रावली पर मौजूद सभी तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए दोषियों को उनके अपराध के लिए दंडित किया जाना न्यायोचित है।
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