अयोध्या, मथुरा की तरह परम कल्याणकारी कल्कि नगरी संभल के 68 तीर्थ और 19 कूपों की चौबीस कोसीय परिक्रमा का गुरूवार की भोर में वंश गोपाल तीर्थ से विधिवत शुभारंभ किया गया।
परिक्रमा में शामिल हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ आस्था की डगर पर आगे बढ़ती चली गई। चंद्रेश्वर तीर्थ पर रात्रि विश्राम हुआ। जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सबका मन मोहा। वहीं, साधु-संतों के प्रवचन ने श्रद्धालुओं को धर्म का मर्म समझाया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने खुद ही परिक्रमा पर निगरानी बनाए रखी।
चौबीस कोसीय संभल तीर्थ परिक्रमा को लेकर लोगों में कितना उत्साह था, इसका नजारा बुधवार की शाम से दिखने लगा था। रात होते-होते प्राचीन तीर्थ श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक में दूरदराज से पहुंचे तीर्थ यात्रियों के सैलाब से तीर्थ परिसर जगमग हो उठा। रात भर भजन कीर्तन का दौर चला।
भक्तों ने मंदिर परिसर में बने पंडाल के नीचे भजन कीर्तन किया। सुबह तीन बजते ही भक्तों ने स्नान शुरू कर दिया। पूजा अर्चना के बाद चार बजे मंदिर के महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज के साथ मुख्य अतिथि भाजपा के जिलाध्यक्ष ओमवीर खड़गवंशी, पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश सिंघल, पूर्व एमएलसी भारत सिंह यादव, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विजय शर्मा, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश यादव, भुवनेश राघव, जीतपाल यादव, विपिन गुप्ता आदि ने भगवान श्री कल्कि की दिव्य सामूहिक आरती में भाग लिया।
अतिथियों ने श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर और झंडा लहराकर परिक्रमा का शुभारंभ किया। परिक्रमा की फेरी माता वाली मिलक, बादल गुबंद, नाहरठेर, खानपुर खुम्मार, फिरोजपुर, क्षेमनाथ तीर्थ होते हुए चंद्रेश्वर महादेव मंदिर चंदायन पहुंची। यहां रात्रि विश्राम के लिए तीर्थ यात्री रुके। अगले दिन यानि एक नवंबर शुक्रवार को फेरी यहीं से शुरू होकर नियत मार्गों से होते हुए वंश गोपाल तीर्थ पहुंचकर संपन्न होगी। इस अवसर पर मेला लगेगा। विशाल भंडारा होगा।