मुरादाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महेंद्र पांडेय बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में रामगंगा नदी के किनारे ई-कचरा और काली राख डाले जाने पर नाराजगी जाहिर की है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने 23 सितंबर को सख्त निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी की नाराजगी के बाद प्रदेश सरकार मुरादाबाद मंडल की औद्योगिक गतिविधियों में उत्पन्न होने वाले ई-कचरा और काली राख को वैज्ञानिक पद्धति से उपचारित करने के लिए अमरोहा में एक प्लांट लगाएगी।
दरअसल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ई-कचरा और काली राख के अवैज्ञानिक तरीके (नदी किनारे खुले में जलाकर) से निस्तारण करने की रिपोर्ट एनजीटी में लगाई थी। इस कृत्य को हार्जेडियस्ट वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 का उल्लंघन माना गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक रामगंगा नदी के पानी में मरकरी की मात्रा भी मानक से कहीं अधिक हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव ने 16 जनवरी 2019 को रिपोर्ट पेश कर चुके हैं कि ई-कचरा और काली राख निस्तारण के लिए दो चरणों में होगा। पहले चरण में नदी के किनारे से काली राख को हटाकर भंडारण, दूसरे चरण में निस्तारण होगा। इसकी प्रगति रिपोर्ट सरकार 3 अगस्त 2019 को पेश कर चुकी है। इसमें भंडारण और स्थायी निस्तारण के लिए अमरोहा पर प्लांट लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया तीन महीने में पूरी कर ली जाएगी। एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हार्जेडियस्ट वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के मुताबिक ही ई-कचरा और काली राख के निस्तारण की निगरानी करने के आदेश जारी किए हैं।