मुरादाबाद। प्रशासन का दावा है कि अस्पतालों में न बेड की कमी है और न ऑक्सीजन की, लेकिन मरीज और तीमारदार परेशान हैं। आलम यह है कि ऑक्सीजन चाहिए तो एजेंसी वाले डॉक्टर का पर्चा मांग रहे हैं, लेकिन डॉक्टर पर्चा नहीं लिख रहे हैं। उधर, गैस एजेंसियों पर प्रशासन ने मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति कर दी है, जो बिना डॉक्टरों के पर्चे के ऑक्सीजन देने को तैयार नहीं हैं।
कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। अस्पतालों में मरीज को ले जाते ही सबसे पहले ऑक्सीजन की डिमांड की जा रही है। तीमारदार हाथों में सिलिंडर लिए गैस गोदामों के बाहर भटक रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक लोग ऑक्सीजन के इंतजार में खड़े रहते हैं। वहीं कुछ तीमारदार ऐसे होते हैं, जिनके पास न तो खाली सिलिंडर हैं और न ही उनकी जमानत राशि जमा करने के लिए दस हजार रुपये की रकम। पर्याप्त ऑक्सीजन होने के दावों के बाद भी शहर में ऑक्सीजन सिलिंडर का काम करने वाली गैस एजेंसियों पर सुबह से लाइन लगी रहती है। ऑक्सीजन के लिए एक एजेंसी से दूसरी पर घूम रहे महानगर निवासी देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पिता सांस रोगी हैं। उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। उनके पास डॉक्टर का पर्चा नहीं है, क्योंकि दिक्कत होने पर घर पर ही इलाज कर रहे हैं। वे दो एजेंसियों पर प्रयास के बाद अब यहां आए हैं। लाकड़ी फाजलपुर ऑक्सीजन गैस एजेंसी पर देवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके बड़े भाई का इलाज शहर के एक अस्पताल में हो रहा है। ऑक्सीजन की जरूरत है, लेकिन डॉक्टर पर्चे पर लिखकर नहीं दे रहे हैं। इसी तरह बुद्धि विहार निवासी संतोष शर्मा, हरिओम सक्सेना, राजेश कुमार को भी अपने मरीज के लिए ऑक्सीजन चाहिए, लेकिन डॉक्टर का पर्चा न होने के कारण मना कर दिया गया।
निर्धारित कोटे के हिसाब से ऑक्सीजन ले रहे अस्पताल, फिर भी तीमारदारों को दौड़ा रहे
शहर के कोविड अस्पतालों का ऑक्सीजन कोटा निर्धारित कर दिया गया है। सभी के पास निर्धारित कोटे के हिसाब से ऑक्सीजन पहुंचती है, लेकिन डॉक्टर तीमारदारों से ही ऑक्सीजन मंगवा रहे हैं। दिल्ली रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कोविड मरीज के पुत्र से डॉक्टर ने ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था करने को कहा। बेटा एजेंसी पर पहुंचा, जहां उससे खाली सिलिंडर लाने को कहा गया। काफी प्रयास के बाद भी खाली सिलिंडर नहीं मिला तो वह फिर एजेंसी पर पहुंचा और जमानत राशि जमा कर सिलिंडर देने को कहा। इस पर उससे डॉक्टर के पर्चे की मांग की गई। अब वह अस्पताल आया तो डॉक्टर ने पर्चा लिखकर देने से मना कर दिया। कहा कि ऑक्सीजन की व्यवस्था उसे खुद करनी चाहिए। दरअसल अस्पतालों को ऑक्सीजन का कोटा निर्धारित है। उतनी गैस उन्हें रोजाना मिल रही है, इसलिए वह पर्चे पर लिखकर नहीं दे पा रहे हैं।
छापेमारी की सूचना लीक, नहीं पकड़े गए कालाबाजारी के आरोपी
एसडीएम सदर प्रशांत तिवारी को एकता कॉलोनी में ऑक्सीजन की कालाबाजारी की सूचना मिली थी, जिस पर उन्होंने पुलिस बल के साथ छापा मारा, लेकिन किसी को पकड़ा नहीं जा सका। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सूचना लीक हो गई, जिससे कालाबाजारी करने वाले भाग निकले। एसडीएम ने कहा है कि सही क्लू मिलते ही रिपोर्ट दर्ज कराकर कालाबाजारी में संलिप्त लोगों को जेल भेज दूंगा।
कोविड अस्पताल ऑक्सीजन मांगे तो प्रशासन को बताएं
कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने कहा है कि कोविड अस्पतालों को डिमांड के अनुसार ऑक्सीजन दी जा रही है। इसके बाद भी यदि तीमारदारों से ऑक्सीजन मंगाई जा रही है तो कोविड कंट्रोल रूम को, संबंधित अस्पताल के नोडल अधिकारी अथवा उन्हें जानकारी दें तो संबंधित अस्पताल पर कार्रवाई की जाएगी। कहा कि ऑक्सीजन की किल्लत के पीछे रैकेट सक्रिय होने की संभावना है। ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। यदि किसी की संलिप्तता मिली तो सख्त कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जाएगा।