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Moradabad News: रामगंगा और गागन का जल स्तर घटा पर दुश्वारियां बढ़ी

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मुरादाबाद। रामगंगा का जलस्तर रविवार की शाम खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर नीचे आ गया। गागन का जलस्तर पहले से घट गया है लेकिन गागन नदी के किनारे और मूंडापांडे क्षेत्र में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। बाढ़ खंड के रिकार्ड के अनुसार कटघर स्थित रामगंगा नदी के खतरे का निशान 190.60 मीटर है लेकिन रामगंगा का जलस्तर शाम तक घटकर खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर नीचे आ गया।
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गागन नदी का जल स्तर 192.28 मीटर है पर गागन नदी 188.70 मीटर नीचे आ गई है। शनिवार को इस्लामनगर, सीएल गुप्ता हास्पिटल रोड का पानी नीचे उतर गया है और आवागमन के लिए रास्ता खुल गया है। जामा मस्जिद के नजदीक ताजपुर रोड से भी पानी नीचे आ गया है लेकिन जन जीवन अभी अस्त-व्यस्त है।

गागन नदी के किनारे 30 परिवारों को प्रशासन ने बाहर निकाला
गागन नदी के किनारे शिवशक्ति नगर (आफत नगरी) में लगभग 200 घर बने हैं। इनमें 120 घर पानी से घिर गए हैं। 75 घरों में पानी घुस गया है। स्थिति अनियंत्रित होने पर राजस्व विभाग की टीमों ने 30 परिवार को रात में निकालकर ढक्का स्थित शरणालय में रखा है। अभी भी लोगों को बाहर निकालने का क्रम जारी है। लेखपाल विवेक गुप्ता ने बताया कि पानी से घिरे लोगों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है।
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चार दिनों से पानी घर में घुसा
गागन नदी के किनारे रह रहे रमाकांत का कहना है कि चार दिनों से घर में पानी घुसा है। घर के सामान को बचाने के लिए लोगों की मदद ली है। प्रशासन ने दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए कहा है। मजदूर लव शर्मा का कहना था कि आफत नगरी के 150 घरों में पानी घुसा हुआ है। लोग परेशान है। जिला प्रशासन रविवार को उनका हाल लेने के लिए आया। लोग खाने और रहने के लिए परेशान हैं।

पांच घर बाढ़ में डूबे
मजदूर विशाल अग्निहोत्री ने बताया कि उसके घर के आस-पास पांच मकान चार दिनों से बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। कई लोग रहने के लिए दूसरे स्थान पर चले गए हैं। महिला कमलेश, आरती और प्रभा देवी का कहना था कि मकान में पानी भरने से परेशान हैं। उन्होंने लेखपाल से शरणालय में भेजने की गुहार लगाई है। उनके पास खाने और रहने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है।

इस्लामनगर रोड की सड़क बनी खतरनाक
बाढ़ का पानी इस्लामनगर रोड से हट गया है लेकिन सड़क सड़क की पटरी पानी से कट गई है। इस रोड पर यदि रात के समय वाहन चलता है तो दुर्घटना हो सकती है। निर्माणाधीन यूनिवर्सिटी में भरा पानी निकल चुका है। अभी खेतों में पानी भरा हुआ है।
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