मुरादाबाद। जिले के ग्रामीण इलाकों में आए दिन दिखने वाले तेंदुए अमानगढ़ या उत्तराखंड के जंगल से नहीं आ रहे हैं। यह एक-डेढ़ दशक पहले जंगल से भटककर आए तेंदुओं की तीसरी पीढ़ी है, जो इसी इलाके में पैदा हुई और बढ़ी। जंगल के बजाय रामगंगा किनारे उगी झाड़ियां और ग्रामीण क्षेत्रों में गन्ने की फसल ही इनका ठिकाना है। यह दावा वन विभाग के अधिकारी और पर्यावरणविद् कर रहे हैं।
मुरादाबाद जिले में वन क्षेत्र बहुत कम है। करीब 64 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र रामपुर रोड पर ट्रंचिंग ग्राउंड के पास रामगंगा नदी के किनारे है। इसमें 10 हेक्टेयर क्षेत्र में डियर पार्क और नर्सरी है। जिले में ठाकुरद्वारा का बाॅर्डर उत्तराखंड के जिम कार्बेट और बिजनौर जिले के आरक्षित वनक्षेत्र अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की सीमा से लगा हुआ है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार उत्तराखंड में करीब 520.82 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जिम कार्बेट पार्क और करीब 95 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में बाघ हैं। बाघों की अधिकता के कारण तेंदुए एक-डेढ़ दशक पहले ठाकुरद्वारा क्षेत्र में आ गए थे। उन तेंदुओं ने उस क्षेत्र में ही गन्ने के खेतों और नदी के किनारे उगी झाड़ियों को ठिकाना बना लिया। यहीं उनका कुनबा बढ़ा और आज वहीं तेंदुए आबादी क्षेत्र में घूम रहे हैं। उनके शावक मिल रहे हैं।
सुरक्षा व शिकार के लिए गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए फायदेमंद
सेवानिवृत्त वन रेंज अधिकारी एवं इकोलॉजिकल उत्थान समिति के अध्यक्ष रामसिंह बिष्ट बताते हैं कि तेंदुओं के लिए सुरक्षा और शिकार दोनों दृष्टिकोण से ग्रामीण इलाके मुफीद साबित हो रहे हैं। जंगल में बाघ का डर भी तेंदुओं को सताता है। दोनों का शिकार लगभग एक जैसा होने के कारण आपस में संघर्ष की संभावना भी अधिक रहती है। तेंदुआ वैसे भी बड़े जानवर का शिकार नहीं कर पाता। गन्ने के खेत और नदी किनारे झाड़ी में छिपकर वह कुत्ता, मोर, खरगोश, गीदड़, सुअर और नीलगाय के बच्चे आदि का शिकार आसानी से कर लेता है।
पिछले तीन महीने में पांच वयस्क तेंदुए रेस्क्यू कर जंगल में छोड़े जा चुके हैं। शावक भी देखे जा रहे हैं। सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि वर्षों पहले भटककर आए तेंदुओं ने गन्ने के खेतों और रामगंगा के किनारों को अपना ठिकाना बना लिया। यहां उनका कुनबा बढ़ा और अब तेंदुओं की तीसरी पीढ़ी सक्रिय दिखाई दे रही है। गन्ने की फसल कटने के बाद ठाकुरद्वारा, कांठ, छजलैट व मूंढापांडे क्षेत्र के साथ शहर से सटे इलाकों में भी तेंदुए दिखाई दे रहे हैं। - सूरज, डीएफओ मुरादाबाद