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Moradabad News: एक माह पहले ही लिख गई थी अधिकारों में कटौती की पटकथा

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मुरादाबाद। केजीके कॉलेज के प्राचार्य से प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को प्रबंधक ने दो प्रोफेसरों को दे दिया है। साथ ही प्राचार्य पर प्रशासनिक अक्षमता, साथी शिक्षकों व स्टॉफ के मध्य भेदभाव आदि का आरोप लगाया है। बताया जाता है कि यह अधिकार एकाएक नहीं छीने गए हैं, बल्कि इसकी पटकथा ईद के त्योहार से पहले ही लिख दी गई थी। वहीं, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का कहना है कि प्रबंध समिति से मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
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कॉलेज के शिक्षकों का कहना है कि प्राचार्य और प्रबंधक के बीच टकराव लंबे समय से चल रहा था। इसके पीछे भवन निर्माण में होने वाला खर्च, अनुमति सहित कुछ अन्य बिंदु शामिल थे। इसमें प्रबंधतंत्र पर एक हजार रुपये से अधिक खर्च करने पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से अनुमति लेने की भी बाध्यता शामिल है। शिक्षकों ने दावा कि वर्ष 2020 के आस-पास जब यह पता चला कि इस अनुमति को लेना बाध्यकारी नहीं है तो प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी ने इस बिंदु को उठाया। इसके बाद यह टकराव बढ़ता गया। शिक्षकों का यहां तक कहना है कि ईद के त्योहार से पहले ही बदलाव के संकेत दिए गए थे। पांच दिन पहले प्रबंधक विवेक खन्ना ने मामले का पटाक्षेप करते हुए प्राचार्य से प्रशासनिक और वित्तीय फैसले लेने का अधिकार वापस लेकर दो अन्य प्रोफेसरों को यह जिम्मेदारी सौंप दी। उन्होंने प्रशासनिक फैसले लेने के अधिकार प्रोफेसर विनोद पांडे को प्रदान किए। वित्तीय फैसले लेने के अधिकार प्रोफेसर विनोद पांडे और प्रोफेसर उपदेश चौहान को संयुक्त रूप से सौंपे गए। प्राचार्य (प्रो. सुनील चौधरी) जिस भी समिति में हैं, उसकी शक्तियां भी प्रोफेसर विनोद पांडे को सौंपने के लिए कहा गया।
बिना निलंबन के नहीं छीने जा सकते अधिकार
शिक्षा जगत से जुड़े उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आयोग से चयनित प्राचार्य की शक्तियों को तब सीज किया जा सकता है, जब उसको प्रबंधक चार्जशीट दें और निलंबित करें। इसके बाद प्रबंधक को अधिकार होते हैं कि दूसरे शिक्षक को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए लगा सकते हैं। इसके बाद मामले में जांच की जाती है। जांच के बाद जो भी निर्णय आता है, वह लागू होता है। इस मामले में सुनने में आया है कि प्राचार्य को निलंबित किए बिना उनकी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां दूसरे शिक्षकाें को दी गई हैं। ऐसे में प्रथमदृष्टया यह कार्यवाही नियम विरुद्ध लग रही है। इसके अलावा दूसरा पहलू यह होता है कि कॉलेज विश्वविद्यालय का एक हिस्सा है। ऐसे में विश्वविद्यालय का अनुमोदन जरूरी है। यदि प्रबंधक को प्राचार्य को बिना निलंबित किए उनकी वित्तीय या प्रशासनिक शक्तियां छीननी हैं तो पहले विश्वविद्यालय के कुलपति या कुलसचिव को लिखा जाना चाहिए। इसके बाद विश्वविद्यालय का अधिकार है कि वह उसको अनुमोदित करे या न करे।
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प्राचार्य ने नहीं किया अनुरोध
प्रबंधक विवेक खन्ना ने बताया कि हमारे हिसाब से एक हजार रुपये की बाध्यता थी, लेकिन प्राचार्य ने बाद में बताया कि बाध्यता नहीं है। मेरा मानना है कि बाध्यता थी या नहीं, लेकिन जब क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी अनुमति नहीं दे रहे थे तो प्राचार्य को उनसे मिलने जाना चाहिए था और कॉलेज की स्थिति से अवगत कराते हुए धनराशि खर्चे की अनुमति देने का अनुरोध करना चाहिए था। हमने कोई भी प्राचार्य बना, हमेशा सहयोग किया है। लेकिन बात जब बच्चों की सुरक्षा पर आ जाएगी तो प्रबंध तंत्र को फिर कार्रवाई करनी पड़ेगी।


वर्जन...
प्राचार्य के अधिकारों को वापस लेने से पहले हमने उच्चाधिकारियों से वार्ता करने के साथ कानूनी सलाह भी ली है। प्राचार्य से अधिकार वापस लेना कानूनन सही है। प्राचार्य अपनी ड्यूटी का सही प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं और हमें यह महसूस हो रहा है कि उनकी ड्यूटी सही नहीं है। ऐसे में किसी को तो जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए लिए नियुक्त किया जाएगा। प्राचार्य को सिर्फ हमारे साथ कोई दिक्कत होती तो फिर भी सही था। लेकिन उनकी ज्यादातर शिक्षकों के साथ दिक्कत चल रही है। उनके द्वारा दो-तीन लोगों की ही बात सुनी जा रही थी।
विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज

हमें प्रबंध समिति ने जो वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां सौंपने का आदेश दिया है, उसके संबंध में हमने उनको सूचित कर दिया है कि यह विधि सम्मत नहीं हैं। प्राचार्य के अधिकार किसी दूसरे अध्यापक को नहीं दिए जा सकते हैं। इसलिए आदेश के अनुपालन में किसी शिक्षक को चार्ज नहीं दिया गया है। इसके अलावा सक्षम अधिकारियों को भी मामले से अवगत करा दिया गया है।
प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य केजीके कॉलेज


यदि प्रबंधक के पत्र की कॉपी हमें भी भेजी गई होगी तो नियमों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करवाना सुनिश्चित करेंगे। हम अपनी तरफ से प्रबंधतंत्र से स्पष्टीकरण मांगेंगे कि यह कार्रवाई किस नियम के तहत की गई है। इसका परीक्षण कर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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डॉ. सुधीर कुमार, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी
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