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Moradabad News: सात दशक पुराने कांग्रेस कार्यालय की छत गिराई गई, सड़क उतरे कांग्रेसी

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मुरादाबाद। सात दशक पुराने कांग्रेस के गुरहट्टी स्थित जिला कार्यालय की छत गिराकर उस पर ताला जड़ दिया गया। मामले की जानकारी होने पर गुस्साए कांग्रेसी कार्यालय के नीचे धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि व्यवसायी ने भूतल के दुकान की रजिस्ट्री कराई और प्रथम तल स्थित कांग्रेस कार्यालय को गिराकर कब्जे का प्रयास किया है। इस मामले में एडीएम सिटी ने दोनों पक्षों को कोतवाली में बुलाकर यथा स्थिति कायम करने के निर्देश दिए हैं।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनोद गुंबर ने बताया कि शनिवार की दोपहर जानकारी मिली कि व्यवसायी विनोद रस्तोगी और उनकी पत्नी शशि रस्तोगी ने कांग्रेस कार्यालय की छत तोड़कर गेट पर ताला जड़ दिया है। गेट पर अपना नाम भी पेंट करा दिया है। घटना की जानकारी मिलने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भड़क गए। उन्होंने कार्यालय के सामने धरना देकर जमकर नारेबाजी की। बताया कि सात दशक पुराने कार्यालय पर भू माफिया कब्जा कर रहे हैं। पहले पेड़ों को काटा गया। पुलिस को लिखित शिकायत दी गई। फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद धीरे धीरे छत गिरा दी गई। इस मामले में जिलाध्यक्ष ने जिला प्रशासन और नगर निगम को अवगत कराया था। अदालत में केस भी दायर किया है। इस मामले में 12 अगस्त को अगली सुनवाई है। इस बीच साजिश के तहत छत गिरा दी गई।
धरना प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद शाम के समय एडीएम सिटी ज्योति सिंह ने दोनों पक्षों को कोतवाली थाने में बुलाया। एडीएम ने दोनों पक्षों से शांति व्यवस्था कायम करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्यालय गेट पर दूसरा ताला जड़ दिया है। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष असलम खुर्शीद, पूर्व विधायक हाजी इकराम कुरैशी, महानगर अध्यक्ष जुनैद इकराम, जिला उपाध्यक्ष सुधीर पाठक, अनुभव मेहरोत्रा आदि नेता मौजूद रहे।
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रंगदारी मांगने का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री तक जाएंगे
शशि रस्तोगी के पुत्र आकाश रस्तोगी का कहना है कि नगर निगम ने पहले ही जर्जर छत को ढहाने के निर्देश दिए थे। इस मामले में उन्होंने मजदूर तीन अगस्त से लगाए थे। दरवाजे पर पेंट कराया था। आरोप लगाया कि कांग्रेस के एक नेता उनसे रंगदारी वसूल रहे थे। पैसा देने से इन्कार करनेे पर उन्हें गालियां दी जा रही हैं। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उसके पास रजिस्ट्री के कागजात मौजूद हैं। आवश्यकता पड़ी तो वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेगा। कांग्रेस नेताओं के पास कोई सबूत नहीं है।
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