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Moradabad News: पांच साल से शासन में अटका रॉ-मेटीरियल बैंक का प्रस्ताव

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मुरादाबाद। रॉ-मेटीरियल बैंक का प्रस्ताव पिछले पांच साल से शासन में पैरवी न होने की वजह से अटका हुआ है। इसके कारण कारखानेदारों को कच्चा माल खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कारखाना संचालकों का कहना है कि रॉ-मेटीरियल बैंक न होने की वजह से कच्चा माल उचित दाम पर नहीं मिल पा रहा है। इससे हस्तशिल्प उत्पाद महंगी कीमत पर तैयार हो रहे हैं। जिसे बाजार में बेचने में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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शहर में तकरीबन दो हजार कारखाने हैं, जिसमें करीब 80 हजार दस्तकार काम कर रहे हैं। इन कारखानों में हस्तशिल्प उत्पाद बनाए जाते हैं। इसके लिए कारखाना संचालकों को कच्चे माल की जरूरत होती है। संचालकों का कहना है कि रॉ-मेटीरियल बैंक में सरकारी मूल्य पर कच्चा माल मिल जाता है लेकिन शहर में बैंक न होने की वजह से कच्चा माल महंगे दामों पर मिल रहा है।
पीतल बस्ती दस्तकार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार रॉ-मेटीरियल बैंक का प्रस्ताव शासन को 2020 में उद्योग विभाग की ओर से भेजा गया था लेकिन मजबूत पैरवी न होने के चलते इससे मंजूरी नहीं मिल सकी। न ही दोबारा प्रस्ताव भेजा गया। वर्ष 2020 में जिला स्तरीय समिति के माध्यम से उद्योग विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया था।
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कारखाना संचालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रस्ताव शासन स्तर पर अटका हुआ है। इससे कारखाना संचालकों में निराशा है। एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी साजिद मंसूरी ने कहा कि शहर में 80 फीसदी कारखानों में इन कच्चे माल से ही हस्तशिल्प के उत्पाद बनाए जाते हैं। ऐसे में रॉ-मेटीरियल बैंक का निर्माण होना जरूरी है।
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चिह्नित कर ली गई थी जमीन
उद्योग विभाग ने प्रस्ताव भेजने से पहले पीतलनगरी रामगंगा पुल के पास तीन हजार वर्ग मीटर जमीन भी चिह्नित कर ली थी। यहां तकरीबन 10 करोड़ रुपये से रॉ-मेटीरियल बैंक का निर्माण प्रस्तावित था।
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क्या है रॉ-मेटीरियल बैंक
रॉ-मेटीरियल बैंक में कारखाना संचालकों को एल्युमीनियम, जस्ता, शीशा, ब्रास, चूनस आदि का रॉ-मेटीरियल सरकारी दाम पर उपलब्ध कराया जाता है।
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शहर में कच्चा माल स्टोर करने के लिए रॉ-मटेरियल बैंक होना चाहिए। 2020 में रॉ-मटेरियल बैंक बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
- मोहम्मद अय्यूब, संरक्षक, पीतल बस्ती दस्तकार एसोसिएशन
कच्चा माल खरीदने और तैयार माल पर जीएसटी अलग-अलग है। इसके साथ ही शहर में कच्चा माल अधिक दाम पर मिल रहा है। तैयार माल और अधिक दाम में बेचना पड़ता है। इसके कारण परेशानी होने लगती है।
-मोहम्मद शमीम
- कच्चा माल और तैयार माल में जीएसटी के बहुत बड़े अंतर से भी कारखानेदारों और निर्यातकों के बीच तालमेल नहीं बन पाता है। जबतक कच्चा माल और तैयार माल के लिए जीएसटी का स्लैब बराबर नहीं होता तब तक परेशानी होती रहेगी।
- साजिद मंसूरी, जनरल सेक्रेटरी, पीतल बस्ती दस्तकार एसोसिएशन
- सरकार की ओर से दस्तकारों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जबकि हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का मुख्य काम दस्तकारों का ही होता है। दस्तकार को दिन के 400 से 500 रुपये की दिहाड़ी मिल पाती है। इससे उन्हें परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है।
- मोहम्मद राजी, सचिव,पीतल बस्ती दस्तकार एसोसिएशन
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इन देशों से आता है कच्चा माल
मुरादाबाद में हस्तशिल्प उत्पाद बनाने के लिए इंडोनेशिया, चाइना, हांगकांग, रूस, अमेरिका, सऊदी अरब, दुबई से कच्चा माल लाया जाता है।
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रॉ-मेटीरियल बैंक की कमी से हानि
कच्चे माल का दाम निर्धारित नहीं हो पाता है।
क्वालिटी से युक्त माल नहीं मिल पाता है।
प्रोडक्ट में माल के अनुपात का पता नहीं हो पाता है।
सरकार के मूल्य पर माल नहीं बिकता है।
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मेरे पास भेजे गए प्रस्ताव की जानकारी नहीं है। इस संदर्भ में संबंधित लोगों से वार्ता कर प्रस्ताव की जानकारी की जाएगी। उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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-योगेश कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग
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