कुंदरकी। आईटीएम डिग्री कॉलेज में आयोजित महफिल-ए-मुशायरे में मुकामी और दूर-दराज से आए शायरों ने कलाम पेश कर वाहवाही लूटी। मुशायरे में शायर राशिद राहत ने कहा कि किसी का खौफ थोड़ी है अलल एलान लिखा है, तिरंगे को हमेशा हमने अपनी जान लिखा है।
डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने सुनाया कि तुम उसको अपना समझ तो रहे हो नाज मगर भरम-भरम है किसी रोज टूट जाएगा। राहुल शर्मा के कलाम हमेशा आलिमों से ही नहीं मिलते सबक, सारे कभी कुछ जाहिलों से भी मगजमारी जरूरी है पर खूब तालियां बजीं। साजिद सफदर ने सुनाया कि जिस दिन से मैं दुनिया की हकीकत से मिला हूं, उस दिन से कोई ख्वाब दिखाई नहीं देता।
इसके अलावा शायर शमशाद आतिफ, खालिद सुल्तानपुरी, रेहान ताबिश, डॉ पूनम चौहान, कमर कुंदरकीवीं, अब्दुल कुद्दूस आदि शायरों ने भी कलाम पेश किए। मुशायरा में शायरों को शाॅल एवं शील्ड देकर सम्मानित किया। आखिर में आयोजक आरिफ पाशा ने सभी मेहमानों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर आरिफ पाशा एडवोकेट, पूर्व प्रधानाचार्य हाजी मुहम्मद इरफान, मुताहिर अली खान, मौलाना अमीर हमजा, मोहम्मद जैद, जीशान सैफी, गुलजार अहमद, हाजी मोहम्मद युनुस, शाहरुख मलिक, जाने आलम, कमर अली दानिश, सूफी शमीम अहमद, डॉ कय्यूम, मंज़ूर अहमद इमरान खान, राशिद चौधरी, गुलाम जिलानी, इंतेखाब आलम, अब्दुल्ला रहमान, मोहम्मद असिम, शाहनवाज सैफी, रशीद यूसुफ अल्वी आदि लोग मौजूद रहे।