बिलारी। नगर के पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व का नौवां दिन बृहस्पतिवार को उत्तम आकिंचन धर्म के रूप में मनाया गया। सुबह जैन समाज के श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर बेदी में विराजमान सभी प्रतिमाओं का शुद्ध जल से अभिषेक किया। इसके बाद श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा की शांतिधारा की गई।
मंदिर में मुनिसुव्रतनाथ भगवान, नमिनाथ भगवान, नेमिनाथ भगवान, अष्टांग सम्यक दर्शन, दस लक्षण धर्म, सोलह कारण, णमोकार महामंत्र, भगवान पार्श्वनाथ और चौबीसी भगवान आदि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी कौशल जैन ने उत्तम आकिंचन धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार में परिग्रह रूपी पिशाच ने प्राणियों को सर्वाधिक दुख दिया है। जो व्यक्ति परिग्रह का त्याग करता है, वही सिद्ध शिला में वास का अधिकारी बनता है। उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य को संसार में रहते हुए यह चिंतन करना चाहिए कि पृथ्वी का अणुमात्र भी उसका अपना नहीं है। अपनी चेतन आत्मा ही वास्तविक स्वरूप है।
इस दौरान राकेश जैन, कौशल जैन, विनोद जैन, संजय जैन, शशांक जैन, प्रतीक जैन, समीर जैन, राजीव जैन, अभिषेक जैन, राकेश कुमार जैन एडवोकेट शिल्पी जैन, शगुन जैन, मिशिता जैन, कल्पना जैन, आशा जैन, निधि जैन, पावनी जैन, रेनू जैन, मानसी जैन, शशि जैन, पूजा जैन, सुरभि जैन, लवी जैन, नेहा जैन, खुशी जैन, आरव जैन, सर्वांग जैन, तनिष्क जैन और यश जैन आदि मौजूद रहे।