मुरादाबाद। शहर के बहुचर्चित डॉ. शैली मेहरोत्रा हत्याकांड की फाइल 11 साल बाद फिर खुलेगी। इतने लंबे अंतराल में जिले के 20 पुलिस कप्तान बदल गए। पुलिस से लेकर एसटीएफ तक 25 से ज्यादा विवेचक इस केस पर काम कर चुके हैं, लेकिन डाॅ. शैली, उनके पति, ननद और पोती की हत्या का राज अब तक अनसुलझा है। पुलिस अब तक यह भी पता नहीं लगा पाई कि इस डॉक्टर फैमिली का दुश्मन आखिर कौन है। पुलिस द्वारा फाइल खोले जाने की कवायद शुरू करने से परिजनों को एक बार फिर इन्साफ की उम्मीद जगी है।
सिविल लाइंस की जिगर कॉलोनी में स्थित विद्या सदन में जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएम डॉ. शैली मेहरोत्रा, उनके पति डॉ. ओम मेहरोत्रा, ननद डॉ. रश्मि मेहरा और पांच साल की पोती दिव्यांशी उर्फ गिन्नी रहती थी। 16 मई 2014 की दोपहर चारों के शव आवास में पड़े मिले थे। पोस्टमार्टम से पता चला था गिन्नी की मुंह दबाकर हत्या की गई थी, जबकि बाकी तीनों का गला रेतकर उन्हें मौत के घाट उतारा गया था।
घटना के समय डॉ. शैली के बेटे उज्ज्वल और बहू बेंगलूरू में एमबीबीएस के बाद एमडी की पढ़ाई कर रहे थे। डाॅ. शैली की बेटी डॉ. गुंजन अरोरा उत्तराखंड के रुद्रपुर में अपनी ससुराल में थीं। जानकारी मिलने पर बेटे-बहू और बेटी मुरादाबाद आ गए थे। हत्यारे घर से सोने-चांदी के जेवर, नकदी और उनकी कार लूटकर ले गए थे।
अगले दिन कार कांठ रोड पर हरथला चौकी के सामने खड़ी मिली थी। मुरादाबाद पुलिस के साथ एसटीएफ ने भी इस केस पर काम किया। पुलिस टीमों ने डॉ. शैली के नौकर, नौकरानी, जिला अस्पताल के कर्मचारी, इलाज कराने वाले मरीज, कंपाउंडर समेत तमाम लोगों से पूछताछ की, लेकिन पुलिस टीमें किसी नतीजे पर नहीं पहुंचीं। डॉ. शैली के बेटे-बहू और बेटी के अलावा शहर के लोग भी जानना चाहते हैं कि आखिर चार लोगों की हत्या किसने और क्यों की थी।
अब पुलिस एक बार फिर इस अनसुलझे हत्याकांड से पर्दा उठाने का प्रयास करने जा रही है। इसके लिए कवायद शुरू की गई है। देश के सबसे चर्चित हत्याकांड में से एक अमरोहा के बावनखेड़ी हत्याकांड की विवेचना करने वाले एसपी गुप्ता का कहना है कि हत्या ऐसा अपराध है, जिसमें कातिल कोई न कोई क्लू छोड़ जाता है। पुलिस टीमों को इस एक बिंदु पर गहनता से जांच करनी चाहिए थी। कड़ी से कड़ी जुड़ती तो खुलासा करने में कोई न कोई मदद जरूरत मिली। अब भी पुलिस इस केस पर काम करे तो सफलता मिल सकती है।