पहली मजलिस मोहल्ला लाकड़ीवालान में मरहूम अली यावर नकवी के मकान पर हुई। जिसे मौलाना हसन मुज्तबा साहब ने खिताब किया। मजलिस में हाजी शबी हैदर ने मर्सिया ख्वानी की। मौलाना हसन मुज्तबा ने कर्बला में पहुंचने तक का मंजर बयान किया। सफर की तकलीफों और कर्बला में हुई यजीद की ज्यादतियों को सुनकर अजादरों के आंसू छलक आए। हाय हुसैन की सदाएं बुलंद होने लगीं। मजलिस के बाद वसीम हैदर ने नोहा पढ़ा। अजादरों ने सीनाजनी की। दूसरी मजलिस इमामबाड़ा मीर सआदत अली स्थित चौमुखापुल पर हुई। वहां मजलिस को मौलाना अली मोहम्मद ने खिताब किया। तीसरी मजलिस मोहल्ला लाकड़ीवालान में इमामबाड़ा हकीम फरजंद अली में हुई। मजलिस में आसिम यावर, डॉ. तनवीर, हाजी अमीरूल हसन, हाजी कायम हसनैन, मोहम्मद अब्बास, हाजी मेहताब हैदर, गुलरेज हैदर रिजवी, आलम आब्दी, नावेद यावर, जावेद यावर, जिम्मी नकवी, शबाब हैदर, गौहर मिर्जा, आसिफ रजा, हैदर रिजवी आदि मौजूद रहे।