मुरादाबाद। सर्दियों की ओर बढ़ते माह-ए-रमजान के कदम से सबसे बड़ा रोजा सिकुड़कर छोटा होने लगा है। पिछले दस वर्षों में रमजान का सबसे लंबा रोजा दो घंटे 11 मिनट छोटा हो गया। वर्ष 2016 में सबसे लंबे रोजे की अवधि 15 घंटे 45 मिनट थी। इस बार सबसे लंबे रोजे की अवधि घटकर 13 घंटे 34 मिनट की हो गई है। आने वाले सालों इस अवधि में और कमी आएगी।
बरसात और गर्मी से खिसक कर मुकद्दस रमजान सर्दियों में पहुंच गया है। इस पाक महीने की शुरुआत 18 या 19 फरवरी से होने की उम्मीद है। इस पाक महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग तीस दिन रोजा रखते हैं। खुदा की इबादत करते हैं। हर रोजे की अवधि तय होती है। इस दौरान रोजेदार भूखे प्यासे रहकर खुदा की इबादत करते हैं। अवधि के हिसाब से हर रमजान का एक रोजा सबसे लंबा होता है। पिछले दस वर्षों में सबसे लंबा रोजा 2016 में पड़ा था। इस रोजे की अवधि 15 घंटे 45 मिनट थी। वहीं इस साल लंबे रोजे की अवधि 13 घंटे 34 मिनट होगी। इस हिसाब से दस वर्षों में सबसे लंबे रोजे की अवधि में 2 घंटे 11 मिनट की कमी आ गई है। वहीं इस बार सबसे छोटा रोजा 12 घंटे 46 मिनट का होगा।
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महीनाें के हिसाब से घटती-बढ़ती है रोजे की अवधि
- मदरसा जामिया नईमिया के मुफ्ती बाकर अली नईमी के मुताबिक रोजे की अवधि कम या ज्यादा महीनों के हिसाब से होती है। गर्मियों में दिन लंबा होता है इसलिए रोजे की अवधि अधिक होती है। जैसे-जैसे रमजान सर्दियों की ओर बढ़ेगा वैसे-वैसे अवधि और कम होती जाएगी।
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एक नजर दस वर्षों में सबसे लंबे रोजों की अवधि पर
वर्ष-अवधि
2016
15 घंटे 45 मिनट
2017
15 घंटे 38 मिनट
2018
15 घंटे 29 मिनट
2019
15 घंटे 12 मिनट
2020
15 घंटे 02 मिनट
2021
14 घंटे 49 मिनट
2022
14 घंटे 37 मिनट
2023
14 घंटे 18 मिनट
2024
14 घंटे 03 मिनट
2025
13 घंटे 49 मिनट
2026
13 घंटे 34 मिनट
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इस बार पांच जुमे की उम्मीद
मुरादाबाद। अगर 18 फरवरी की शाम चांद का दीदार हुआ तो 19 फरवरी से मुकद्दस रमजान के शुरू होने की पूरी उम्मीद है। आखिरी राेजा 20 मार्च को होगा। इन तीस दिनों में रोजेदारों को इबादत करने के लिए पांच शुक्रवार (जुमा) मिलेगा। ये पांच जुमे 20 फरवरी, 27 फरवरी, 6 मार्च, 13 मार्च और 20 मार्च को पड़ेंगे। इस हिसाब से इस बार आखिरी रोजा अलविदा (आखिरी जुमा) होगा।