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Moradabad News: तेंदुए ने अपनी आदत दोहराई...फिर भी टीम पकड़ नहीं पाई

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मुरादाबाद। कहा जाता है कि तेंदुआ जहां अपना शिकार करता है वहां दूसरी बार भी आता है। ये उसकी आदत में शुमार है। लेकिन तेंदुए की इस आदत से वाकिफ वन विभाग की टीम उसे पकड़ नहीं सकी। जबकि बहापुर बलिया में तेंदुआ हमला करने तीन बार पहुंचा। दो महिलाओं समेत तीन को अपना शिकार बनाया।
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ठाकुरद्वारा के लालापुर पीपलसाना में 18 अगस्त को तेंदुए के हमले में जान गंवाने वाली ब्रह्मो देवी पति के साथ खेत पर चारा काटने गईं थीं। जहां वह तेंदुए की शिकार बन गई। करीब सात दिन बाद 25 अगस्त को इसी गांव की मिथलेश देवी खेत से चारा लेने गई थी। इस दाैरान पति बृजपाल सिंह सैनी, गांव के दीवान सिंह, जाॅनी, नन्हें सिंह, गीता देवी, दिनेश सिंह उनके आसपास ही माैजूद थे। तभी तेंदुए ने मिथलेश देवी पर हमला कर दिया और मार डाला।
जबकि 29 अगस्त को तेंदुआ गांव में घुस आया और सो रहे दिव्यांग जगराज सैनी को उठा ले गया। सुबह जंगल में उनका शव मिला। भले ही वन विभाग तीनों हमले में एक तेंदुए के होने की बात से इन्कार कर रहा हो लेकिन तेंदुओं के दोबारा आने की आदत से भलिभांति परिचित वन विभाग ने अधिक सक्रियता नहीं दिखाई।
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किसी रिहायशी इलाके में तेंदुआ किसी जानवर का शिकार करता है और उसका आधा शरीर वहीं छोड़ देता है तो वन विभाग खुद चेतावनी देता है कि वहां दोबारा न जाएं। तेंदुआ अपने उस बचे हुए भोजन के लिए उसी रात या अगली रात वहां निश्चित रूप से वापस आएगा। ऐसे मामलों में वन विभाग उसी शिकार के आस पास पिंजरा या ट्रैप कैमरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की कोशिश करता है। अगर वन विभाग सक्रियता दिखाता तो आदमखोर तेंदुए उनकी जाल में होते। साथ ही दो जानें भी बच सकतीं थीं।
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दो ट्रैप कैमरे लगाए गए
मुरादाबाद। मंडलीय वर संरक्षक आदर्श कुमार का कहना है कि तेंदुआ शिकार करने वाली जगह पर दोबारा जरूर आता है। इसे देखते हुए बहापुर बलिया में दो ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। एक कैमरा जगराज सैनी के घर के पास लगाया गया है। जबकि दूसरा जहां शव मिला था।

तेंदुए की कुछ आदतें
- तेंदुआ शिकार करने के बाद उस जगह या अपने बचे हुए शिकार के पास दूसरी बार या कई बार वहां जरूर वापस आता है। वह अपने शिकार को एक ही बार में पूरा नहीं खाता। वह बचे हुए मांस को दोबारा खाने आता है।
- अगर तेंदुए ने किसी खास स्थान (जैसे कोई घर, बाड़ा या खेत) पर आसानी से शिकार (जैसे कुत्ता, बकरी या मवेशी) किया है, तो वह उस जगह को याद रखता है।
- कई बार तेंदुआ शिकार को मारने के तुरंत बाद नहीं खाता। आसपास के खतरों को भांपने के लिए थोड़ी देर के लिए वहां से हट जाता है और माहौल शांत होने पर दोबारा अपने शिकार को लेने आता है।
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- तेंदुए स्वभाव से अकेले रहने वाले जीव हैं, ये पेड़ पर चढ़ने में बेहद माहिर होते हैं।
- तेंदुए मुख्य रूप से निशाचर होते हैं, वे रात के अंधेरे में शिकार करना और घूमना पसंद करते हैं।
- उनकी आंखों की रोशनी रात में इंसानों से छह गुना ज्यादा तेज होती है।
- तेंदुए विभिन्न प्रकार के माहौल जैसे घने जंगल, पहाड़ी इलाके और यहां तक कि इंसानी बस्तियों के पास भी खुद को ढाल लेते हैं।
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