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Moradabad News: रोशनी लौटाने में स्वास्थ्य विभाग को हुआ मोतियाबिंद

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मुरादाबाद। राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम में सरकारी अस्पतालों की स्थिति खराब है। जिला स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट यही बयान कर रही है। जनवरी से दिसंबर 2025 तक जिला अस्पताल को साल में 10,893 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने का लक्ष्य मिला, इनमें से सिर्फ अब तक 1132 मरीजों के ही ऑपरेशन हो पाए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार मोतियाबिंद ऑपरेशन और निशुल्क चश्मा वितरण जैसे अहम कार्यों में लक्ष्य के मुकाबले उपलब्धि बेहद कमजोर रही है। मोतियाबिंद ऑपरेशन का कुल लक्ष्य 54,464 रखा गया था, लेकिन इनमें से सिर्फ 26,862 ऑपरेशन ही हो सके। यानी कुल उपलब्धि महज 49.32 प्रतिशत रही।
सरकारी क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। जिला अस्पताल में 10,893 ऑपरेशन का लक्ष्य था, लेकिन सिर्फ 1132 ऑपरेशन हुए। मात्र 10.39 प्रतिशत मरीजों को ही मोतियाबिंद से मुक्ति मिल पाई। विभिन्न गैर सरकारी संगठनों व ट्रस्ट द्वारा ऑपरेशन कराए जाने का लक्ष्य भी 10893 था, जिसमें 6,398 ऑपरेशन हुए। यहां उपलब्धि 58.73 प्रतिशत रही। प्राइवेट क्षेत्र में 32,678 ऑपरेशन का लक्ष्य रखा गया, जिनमें 19,332 पूरे हुए। इनकी उपलब्धि 59.16 प्रतिशत रही।
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केवल ऑपरेशन ही नहीं बल्कि निशुल्क चश्मा वितरण में भी विभाग लक्ष्य से काफी पीछे रह गया। साल में 3600 बच्चों को निशुल्क चश्मा देने का लक्ष्य था। नवंबर तक केवल 1541 बच्चों को ही चश्मे मिल सके। यह लक्ष्य का आधा भी नहीं है। बुजुर्गों के लिए 1800 चश्मों का लक्ष्य तय किया गया था, जबकि वितरण सिर्फ 834 तक सिमट गया।
स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की किल्लत कम ऑपरेशन के आंकड़े का कारण है। डॉक्टरों की तैनाती के लिए शासन स्तर पर ही समाधान हो सकता है। विभाग का कहना है कि जिले में अक्तूबर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन लक्ष्य के सापेक्ष 29.66 प्रतिशत किए गए थे। नवंबर में बढ़कर यह आंकड़ा 49.26 प्रतिशत हो गया है।

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आठ माह में 97 आशा कार्यकर्ताओं ने नहीं कराया एक भी प्रसव

सिर्फ मोतियाबिंद के ऑपरेशन ही नहीं संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर भी सरकार का जोर है। इसके बावजूद जिले में 97 आशा कार्यकर्ताएं ऐसी हैं, जिन्होंने अप्रैल से नवंबर 2025 तक एक भी प्रसव नहीं कराया है। इनको चिह्नित कर विभाग ने अंतिम चेतावनी जारी की है। दिसंबर में स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इनकी नौकरी पर खतरा बना रहेगा। दूसरी ओर कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन मशीन व अन्य उपकरणों की किल्लत है।
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हर साल 700 ऑपरेशन भी नहीं कर पा रहे नेत्र सर्जन

जिला अस्पताल में चार नेत्र सर्जन तैनात हैं। इनमें से डॉ. एक्यू अंसारी और डॉ. भवतोष शंखधर ही लक्ष्य के सापेक्ष ऑपरेशन कर पाए हैं। साल में 700 ऑपरेशन के लक्ष्य के सापेक्ष डॉ. अंसारी ने नवंबर तक 676 और डॉ. भवतोष ने 651 ऑपरेशन किए हैं। इनके अलावा डॉ. मोनिका सिर्फ 383 ऑपरेशन कर पाई हैं। डॉ. वीपी सिंह ने सिर्फ 156 मरीजों को मोतियाबिंद से मुक्ति दिलाई है।
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सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या सीमित है जबकि शासन द्वारा निर्धारित किया गया लक्ष्य आबादी के 20 प्रतिशत के अनुसार है। प्रति डॉक्टर 700 ऑपरेशन एक साल में होने चाहिए। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए डॉक्टरों को कहा गया है। चश्मों के लिए प्रदेश से बजट मांगा गया है।
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- डॉ. विकास सिंह, डिप्टी सीएमओ
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