मुरादाबाद। आग लगने के बाद परिवार को फंसा देखकर रेस्टोरेंट संचालक प्रदीप श्रीवास्तव की सांसें अटकी हुईं थीं। बदहवास स्थिति में सिर्फ मदद की गुहार लगा रहे थे। उनके जीजा सचिन भटनागर साथ में थे।
कांठ के मोहल्ला फकीरगंज निवासी रेस्टोरेंट मालिक के जीजा सचिन भटनागर ने बताया कि वह रात में दस बजे टीवी देख रहे थे। इस बीच आतिशबाजी की आवाज आ रही थी। कुछ ही देर में सिलिंडर फटने लगे। धुआं फैलने लगा। वह बचाव करने के लिए नीचे गए तो आग के डर से भागकर ऊपर चढ़ने लगे। सबकी सांसें अटकी हुईं थी। बच्चे और पत्नी भी जान बचाने की गुहार लगा रहे थे। कुछ देर ऐसा लगा कि अब बचना मुश्किल है। इस बीच उनके साले प्रदीप श्रीवास्तव बचाव के लिए लोगों को कॉल कर रहे थे। आसपास के लोग बचाव के लिए चादर और डंडे लेकर आए। उस समय रेस्टोरेंट में प्रदीप के साथ उनकी पत्नी शिवानी और दो बच्चे परी व वैभव के साथ ही मां मंजू उर्फ माया श्रीवास्तव, पिता जयप्रकाश श्रीवास्तव, बहन साधना, बहनोई सचिन भटनागर, उनके दो बच्चे शौर्य और अभिनव, भांजा वंश घर पर मौजूद थे। कारीगर अजय भी उस समय रेस्टोरेंट बंद कर रहा था। प्रदीप ने बताया कि जब आग लगी और रेस्टाेरेंट के ऊपर की मंजिलो में धुआं और आग की लपटें पहुंचीं तो दम घुटने लगा। सभी भाग कर छत पर चढ़े और शोर मचाने लगे। इस बीच फायर ब्रिगेड की टीम और पुलिस भी पहुंच गई। परिवार के लोग बिल्डिंग के बगल में लगी एक बड़ी होर्डिंग के सहारे करीब दो मंजिल नीचे तक आए। होर्डिंग में ही चादर बांध कर लोग कूदने लगे। नीचे सुरक्षा के लिए ग्रामीण तिरपाल लेकर खड़े थे। नीचे खेत होने के कारण कूदना आसान था।
गैराज में खड़ी चार कारों को बचाया गया
परी रेस्टोरेंट से सटे पीतलनगरी मुफ्ती टोला निवासी मोहम्मद खालिद का गैराज हैं। इसकी देखरेख उनके भाई युनूस करते हैं। युनूस ने बताया कि रात जिस समय आग लगी गैराज में मरम्मत के लिए सात कारें खड़ीं थीं। आग की सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे थे। उस समय तीन कारें जल रही थीं। चार अन्य कारों को किसी तरह हटाया गया। इनमें से एक कार पूरी तरह बनकर तैयार थी। ग्राहकों ने अपनी कारों की हालत देखी। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है।