कांठ। नगर के प्राचीन माता महाकाली के मंदिर (माता के थान) पर हर वर्ग के लोग स्वत: ही नतमस्तक हो जाते हैं। यहां जाति, वर्ग कोई मायने नहीं रखता। इस सिद्ध स्थल से हर किसी की आस्था जुड़ी है।
नगर में पुरानी गुड़ मंडी स्थित प्राचीन माता महाकाली मंदिर से नगर व क्षेत्र के ही नहीं दूर-दराज के श्रद्धालुओं की भी आस्था जुड़ी है। यहां माता के दरबार में हर कोई खुद नतमस्तक हो जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां महामाई के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। माता महाकाली मंदिर काफी प्राचीन बताया जाता है, समय-समय पर इसका जीर्णोंद्धार भी होता रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि उत्तराखंड के काशीपुर वाली देवी कभी इसी मंदिर में विराजमान थीं। जहां अब मंदिर है, वहां कभी घना वन हुआ करता था। वहीं इस मंदिर पर नवविवाहित जोड़े माता के दरबार में हाजिरी देकर माथा टेकते हुए जात लगाते हैं। यहां वह देवी मां से सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अपने बच्चों को झाड़ा लगवाने तथा मनौती पूरी होने के बाद प्रसाद चढ़ाने के लिए हर रोज ही यहां श्रद्धालु आते हैं। कहते हैं कि मंदिर से मिलने वाली भभूत और झाड़े से बड़ी से बड़ी व्याधि कट जाती है। यहां पर हर वर्ग के लोग अपने बच्चों को लाकर स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त करते हैं।
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तीन दिवसीय 56वां वार्षिकोत्सव 26 मार्च से
कांठ। नगर स्थित प्राचीन माता महाकाली मंदिर (माता के थान) पर चैत्र नवरात्र में हर साल तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। जिसमें विशाल शोभायात्रा भी नगर में निकाली जाती है। बुधवार को कमेटी के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह ने बताया कि इस बार वार्षिकोत्सव 26 से 28 मार्च तक मनाया जाएगा। जिसमें 26 मार्च को मंदिर परिसर में दुर्गा अष्टमी पर शाम को महिला कीर्तन, 27 मार्च को नवमी पर प्रात: यज्ञ, दोपहर को भंडारा व प्रसाद वितरण और रात्रि को देवी का जगराता होगा। 28 मार्च को दशमी के दिन शाम को नगर में भव्य विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। जिसमें मुख्य आकर्षण मां का डोला (पालकी) रहेगी। कार्यक्रम को लेकर कमेटी के द्वारा तैयारियां की जा रही हैं। संवाद