- मैं इस फैसले का समर्थन करता हूं। अच्छा फैसला है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। हालांकि इसमें कुछ नया नहीं है। ऐसे फैसले पहले भी आते रहे हैं।
मो. जुनैद एजाज वरिष्ठ अधिवक्ता
तलाक देने से बुरा काम कोई नहीं है। इसकी नौबत नहीं आनी चाहिए। तलाकशुदा पत्नी कोर्ट में गुजारे भत्ता का मुकदमा डाल कर उसे हासिल कर सकती है। लेकिन शरीयत के हिसाब से महर अगर महिला ने ले लिया है तो उसका कोई हक नहीं रह जाता है।
शीरीगुल, पार्षद
फैसला बेहतर है। तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार होना चाहिए। पहले जजों के विवेक पर निर्भर होता था। सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले से तलाकशुदा महिलाओं को अपना हक मांगने का अधिकार मिल गया है। - रेशमा बेगम, वरिष्ठ अधिवक्ता