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Moradabad News: मंडल में नीचे आया कारोबारी ग्राफ, कहीं 30 तो कहीं 25 फीसदी की गिरावट

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मुरादाबाद। मंडल के जिलों की कारोबारी स्थिति अच्छी नहीं है। अमरोहा की ढोलक को छोड़ दें तो हर जिले की रीढ़ कहे जाने वाले मुख्य उत्पादों का कारोबारी ग्राफ सालभर में नीचे आया है। यह हाल तब है जब जनपद के यह मुख्य उत्पाद एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में भी शामिल हैं।
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मुरादाबाद के हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात में 30 फीसदी की गिरावट आई है तो रामपुर में जरी के साथ-साथ ओडीओपी में शामिल मेंथा को झटका लगा है। कारोबारी बताते हैं कि 21 हजार किसान मेंथा की खेती छोड़ चुके हैं। संभल के हड्डी-सींग उत्पादों के निर्यात में 25 फीसदी की कमी आई है। अमरोहा की ढोलक की गूंज जरूर संतोषजनक है लेकिन अलग औद्योगिक क्षेत्र और लकड़ी के लिए वन डिपो की मांग पूरी न होने से वहां के कारोबारी निराश हैं। अमेरिका में ट्रंप की टैरिफ की मार और कई देशों में युद्ध जैसे हालात से मंडल में अलग-अलग उत्पादों के निर्यात से जुड़े कारोबारी आने वाले दिनों को लेकर भी आशंकित हैं।



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एक साल में मुरादाबाद का निर्यात 30 प्रतिशत घटा

मुरादाबाद। अमेरिकी टैरिफ की मार और कच्चे माल की महंगाई के बीच पीतलनगरी का हस्तशिल्प निर्यात पिछले साल (वर्ष 2025) में बुरी तरह प्रभावित हुआ। जिले के निर्यात में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों के अनुसार तुलनात्मक वर्ष से करीब तीन हजार करोड़ का निर्यात कम हुआ है। जिला उद्योग केंद्र में मुरादाबाद के नौ हजार लोगों ने निर्यात-आयात के लिए पंजीकरण करा रखा है। इसमें करीब दो हजार लोगों ने सिर्फ निर्यात के लिए पंजीकरण कराया है। करीब 1200 लोग ऐसे हैं जो हर साल हस्तशिल्प का निर्यात करते हैं। जिला उद्योग केंद्र के रिकॉर्ड के मुताबिक जिले से वर्ष 2024 में 10437 करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात हुआ था। जबकि 2025 में यह घटकर करीब 7000 करोड़ पर थम गया। ईपीसीएच की नजर में जिले के करीब 2.50 लाख लोग हस्तशिल्प उत्पादों के कारोबार से जुड़े हैं।
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रामपुरः 21 हजार किसानों ने छोड़ी मेंथा की खेती



रामपुर। सिंथेटिक मेंथा और अमेरिकी टैरिफ के कारण रामपुर के मेंथा कारोबारियों के कदम भी ठिठक गए हैं। जरी के साथ-साथ मेंथा भी रामपुर के ओडीओपी उत्पादों में शामिल है। आंकड़े बताते हैं कि जिले में मेंथा का उत्पादन 24 हजार टन से घटकर 20 हजार टन पर आ गया। सही दाम नहीं मिलने से मेंथा की खेती से किसानों का मोह भंग हो गया है। जिले में करीब 21 हजार किसानों ने मेंथा की खेती छोड़ दी है। मेंथा कारोबारियों ने सरकार से 50 प्रतिशत सब्सिडी और सिंथेटिक मेंथा पर रोक लगाने की मांग की है। मेंथा एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं रामपुर के बड़े कारोबारी संचित गुप्ता ने बताया कि पिछले वर्ष तक रामपुर में तीन हजार करोड़ के आसपास का सालाना मेंथा कारोबार था। अब यह घटकर एक से डेढ़ हजार करोड़ पर पहुंच गया है। लघु उद्योग भारती के मंडल सचिव विपिन ने बताया कि किसान तेजी से मेंथा से दूर हो रहे हैं। जिले में पिछली क्रॉप 24 हजार टन थी, जो इस बार घटकर 20 हजार टन पर आ गई। सरकार को सिंथेटिक मेंथा पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही 50 प्रतिशत की सब्सिडी भी देनी चाहिए।



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अमरोहा : ढोलक की गूंज सही, औद्योगिक क्षेत्र की सुविधा नहीं मिली



अमरोहा। देश दुनिया में अमरोहा की पहचान बन चुकी ढोलक के कारोबार में संसाधनों की कमी आड़े आ रही है। ओडीओपी में शामिल ढोलक के काम को और मजबूती देने के लिए कारोबारी अलग औद्योगिक क्षेत्र और लकड़ी के लिए वन डिपो की मांग कर रहे हैं। लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल का कहना है कि ओडीपीओ में शामिल होने के बाद जिले में कारोबार तो बढ़ा, लेकिन सुविधाएं नहीं। पिछले काफी समय से औद्योगिक क्षेत्र की मांग की जा रही है। इससे सहूलियत के साथ बिजली में भी फायदा मिलेगा। इससे ढोलक व लकड़ी उत्पादों का कारोबार और ऊंचाई छुएगा लेकिन वन डिपो और औद्योगिक क्षेत्र की मांग आश्वासन तक ही सीमित है। जिले में इस काम से जुड़े करीब 300 कारखाने हैं। लगभग ढाई हजार लोग इस कारोबार से जुड़े हैं।



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संभलः हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात में 25 फीसदी की कमी



संभल। संभल में हड्डी-सींग के साथ लकड़ी के हस्तशिल्प उत्पादों ने भी दूर-दूर तक पहचान बनाई है। ईरान के माहौल, खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात, कच्चे माल की कीमतों में उछाल से इन उत्पादों की चमक फीकी पड़ने लगी है। ईरान के कारण संभल के ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं। एक साल की तुलना में निर्यात में करीब 25 फीसदी की कमी आई है। 2024-2025 में चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार था। निर्यातकों का कहना है कि इस समय धातुओं की कीमतें भी ज्यादा हैं। इससे उत्पादों की मांग गिरी है। कारोबार काफी प्रभावित है। संभल हैंडीक्राफ्ट सोसायटी के अध्यक्ष कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि अभी बाजार की स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिलहाल ऑर्डर कहीं से नहीं हैं। पुराने ऑर्डरों पर तैयार उत्पाद भेजने तक ही सीमित हैं।



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जीआई टैग से संभल को अलग पहचान



संभल के हस्तशिल्प उत्पादों के लिए पिछले वर्ष बोन क्राफ्ट को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई टैग) प्रमाणपत्र जारी हो चुका है। इससे कारोबार को उछाल मिलने की पूरी उम्मीद है। कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि वर्ष 2022 में जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। अप्रैल 2024 में प्रमाणपत्र जारी हो गया। वार्ष्णेय भी सिंथेटिक मेंथा से जिले का काम प्रभावित होने की बात कहते हैं। वह भी इस पर रोक और प्राकृतिक मेंथा को प्रोत्साहन पर जोर दे रहे हैं।
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