आश्चर्य की बात यह रही कि सभी मुकाबलों में कुणाल ने प्रतिद्वंद्वी को 3-0 से हराया। उन्होंने अपने वर्ग के सिंगल्स मैच में ग्रुप राउंड में पहला मुकाबला राम अचरज (राजस्थान) को 3-0 से हराया, दूसरा ग्रुप मैच आदेश कुमार (दिल्ली) को भी 3-0 से हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में सुनील कुमार (हरियाणा) को भी अपने शानदार खेल के जरिये 3-0 से मात दी। सेमी फाइनल में अमरेश कुमार सिंह (उत्तर प्रदेश) को भी 3-0 के स्कोर से हराया। फाइनल में गजानन परमार (मध्य प्रदेश) के साथ मैच में भी वह 3-0 के स्कोर से विजयी रहे।
इसी टूर्नामेंट में मेन्स डबल्स मुकाबले में अपने पार्टनर हितेश डोलवानी (तेलंगाना) के साथ जोड़ी बनाई। पहले मैच में योगेश एवं रोहित की जोड़ी को 3-0 से हराया, दूसरे मैच में बसप्पा एवं संगमेश की जोड़ी को भी 3-0 से हराया। क्वार्टर फाइनल में राकेश एवं गौरव की जोड़ी को भी 3-0 से परास्त किया। सेमी फाइनल में नीतीश एवं ब्रिजेंद्र की जोड़ी को 3-1 से मात दी। फाइनल में दत्ता एवं रवींद्र की जोड़ी को संघर्ष पूर्ण मुकाबले में 3-2 से हराया।
मिक्स डबल्स वर्ग के मैच में अपनी साथी प्रूथ्वी बारवे (महाराष्ट्र) के साथ जोड़ी बनाई। प्रखर एवं त्रिवेणी की जोड़ी को 3-0 से, राकेश एवं भारती की जोड़ी को 3-0 से, रवींद्र एवं सविता कि जोड़ी को भी 3-0 से व अंतिम मैच में शक्ति व प्राची की जोड़ी को 3-1 से हराया। इस तरह कुणाल ने तीन स्वर्ण पदक जीते।
वह इससे पहले भी कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में पदक जीत चुके हैं। कुल 19 पदकों में से उनके पास सात अंतरराष्ट्रीय व 12 राष्ट्रीय पदक हैं। इनमें 10 स्वर्ण, तीन रजत व 6 कांस्य हैं। कुणाल ने हमेशा की तरह अपनी जीत का श्रेय अपने पिता यशपाल अरोड़ा, मां सोनिया अरोड़ा व कोच को दिया है।