जाली नोट चलाने के करीब छह साल पुराने मामले में अदालत ने एक अभियुक्त को दोषी करार देते हुए उसे दस साल कैद और पंद्रह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मुकदमे के दूसरे अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। पुलिस की कमजोर तफ्तीश और लचर अभियोजन दूसरे अभियुक्त पर लगे चार्जेज को कोर्ट में साबित नहीं कर सके।
जाली नोटों का यह मामला अक्तूबर 2009 में सिरसी स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक ने मैनाठेर थाने में दर्ज कराया था। मुकदमे में इरफान पुत्र गुन्नौरी निवासी सिरसी थाना मैनाठेर को नामजद किया गया था। वह बैंक में अपनी पत्नी के खाते में रकम जमा करने गया था जिसमें पांच - पांच सौ के सत्रह नोट नकली थे।
इस मामले में पुलिस ने तफ्तीश के बाद मोहम्मद असलम उर्फ छुन्नू पुत्र मोहम्मद अशरफ उर्फ मुन्नू निवासी सारक सराय सिरसी थाना मैनाठेर को भी मुल्जिम बनाया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी प्रथम अवनीश कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई।
संयुक्त निदेशक अभियोजन रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि सुनवाई के बाद अदालत ने असलम को दोषी करार देते हुए उसे दस साल कैद और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि साक्ष्यों के अभाव में इरफान को बरी कर दिया गया।