देश की पहली हाई स्पीड ट्रेन टेल्गो का ट्रायल रविवार को मुरादाबाद से बरेली के बीच किया गया। ट्रेन को पहले ट्रायल में अधिकतम 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया गया। इससे पहले ट्रेेन को बरेली से मुरादाबाद लाया गया। ट्रेन के 12 ट्रायल हाेंगे। ट्रेन के सभी ट्रायल मुरादाबाद से बरेली के बीच होंगे। रविवार का दिन भारतीय रेल के इतिहास के महत्वपूर्ण दिनों में शामिल हो गया। मुरादाबाद बरेली ट्रैक पर भारत की पहली स्पेन में बनी हाई स्पीड ट्रेेन का ट्रायल किया गया। पहले दिन का ट्रायल बिना सफल रहा।
रविवार को ट्रायल के लिए ट्रेन को बरेली से मुरादाबाद लाया गया। ट्रेन को 80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से मुरादाबाद तक चलाया गया। बरेली से ट्रेन सुबह 9:00 पर रवाना हुई। ट्रेन को मुरादाबाद लाकर प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ा कर दिया गया। ट्रेन मुरादाबाद में सुबह 10:20 पर पहुंची। मुरादाबाद में सभी इंस्ट्रूमेंट्स का चेकअप कर सेट किया गया। ट्रेन में सभी इंस्ट्रूमेंट्स मुरादाबाद से बरेली की दिशा में ट्रायल के लिए लगाया गए हैं। छह कोच की ट्रेन में 32 सेंसर लगाए गए हैं। ट्रेन में यात्री ना होने के कारण वजन के लिए सीटों के नीचे बालू के भरे हुए बोरे रखे गए। इसके अलावा अलावा ट्रेन का ट्रैक पर पड़ने वाले दबाव को मापने के लिए भी उपकरण लगाए गए। ट्रैक क्लियर होने के बाद 12:43 पर ट्रेन को ट्रायल के लिए चलाया गया। मुरादाबाद से बरेली के बीट ट्रायल के दौरान टेल्गो की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही। ट्रेन बरेली 2.00 बजे पहुंची। ट्रेेन के ट्रायल का निर्देशन आरडीएसओ लखनऊ के एग्जक्यूटिव डायरेक्टर हामिद अख्तर कर रहे हैं।
ट्रेन को बरेली से मुरादाबाद ट्रायल के लिए लाया गया। ट्रेन में ट्रायल के लिए लगाए गए सभी उपकरण मुरादाबाद से बरेली की दिशा में लगाए गए हैं। ट्रैक के कर्व, ज्वाइंट पर पड़ने वाले दबाव नापने के लिए उपकरण लगाए गए हैं। ट्रेन में आरडीएसओ लखनऊ और स्पेन के इंजीनियर की टीम लगाई गई है।
- हामिद अख्तर, एग्जक्यूटिव डायरेक्टर आरडीएसओ लखनऊ
ट्रेन को ट्रायल के लिए पहले दिन 80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से लाया गया। ट्रायल मुरादाबाद से बरेली की दिशा में किया गया। वापसी में ट्रेन 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाई गई। पहले दिन सब कुछ ओके रहा। रविवार को दो फेरे लगाए जाने थे, तकनीकी कारणों से केवल एक फेरा ही लग सका।
प्रमोद कुमार, डीआरएम, मुरादाबाद
ट्रेेन को देखने का रहा क्रेज
मुुरादाबाद। ट्रेन को देखने के लिए लोगों में जबरदस्त क्रेज रहा। स्टेशन पर आने के बाद यात्रियों के अलावा बाहर से भी लोग पहुंच गए। हालांकि सुरक्षा कारणों ने उसके नजदीक नहीं जाने दिया। दूर से ही लोग उसे देखते रहे। जो उसके नजदीक पहुंच पाए वे ट्रेन के साथ सेल्फी लेते हुए दिखाई दिए।
ट्रेन की खूबियां
- भारतीय कोच की तुलना में टेल्गो के कोच बेहद छोटे हैं। टेल्गो के कोच 12 मीटर है। जबकि भारतीय कोच की लंबाई 22 मीटर होती है।
- ट्रेन के कोच एल्युमिनियम से बने हैं। जिसकी कीमत 1.70 करोड़ रुपये है। जबकि भारत के एलएचबी कोच की कीमत 2.75 करोड़ रुपये है।
- सभी कोच एनर्जी एफिसिएंट हैं और तीस प्रतिशत तक बिजली की खपत कम होती है।
- कोच के अंदर का इंटीरियर फायरप्रूफ है। कोच में लगे साउंड इंसुलेशन से आवाज मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा।
- ट्रेन के कोच इस तरह डिजाइन किए गए हैं जिससे वे अधिक स्पीड पर भी आसानी से मुड़ सकें।
- ट्रेन के व्हील इस प्रकार से डिजाइन किए गए है कि उनमें एक्सल नहीं लगा है।