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तकनीक - उत्तर रेलवे हर माह बचाएगा एक करोड़ गैलन पानी

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मुरादाबाद। उत्तर रेलवे अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके प्रतिमाह एक करोड़ गैलन पानी बचाएगा। साथ ही उपयोग किए गए पानी को रिसाइकिल भी किया जा सकेगा। रेलवे द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। दरअसल उत्तर रेलवे के पांच बड़े स्टेशनों पर मुरादाबाद रेल मंडल के योगनगरी ऋषिकेश की तर्ज पर आटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट लगाए जाएंगे।
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अभी मैनुअल प्रणाली से ट्रेनों की धुलाई की जा रही है। इससे एक कोच को धोने में 1500 लीटर और 24 कोच वाली पूरी ट्रेन को धोने में 36 हजार लीटर पानी लगता है। अत्याधुनिक तकनीक वाला कोच वाशिंग सिस्टम लगने के बाद एक कोच को धोने में सिर्फ 300 लीटर पानी लगेगा। इससे प्रतिदिन 12 लाख 49 हजार 500 लीटर और प्रतिमाह एक करोड़ गैलन यानी तीन करोड़ 74 लाख 85 लीटर पानी की बचत होगी। साथ ही उपयोग किए गए पानी को रिसाइकिल कर दोबारा प्रयोग में लाया जा सकता है। फिलहाल यह प्लांट योगनगरी ऋषिकेश, श्री माता वैष्णो देवी (कटरा), दिल्ली सराय और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर संचालित किया जा रहा है। अब इसके बाद आनंद विहार, वाराणसी, जालंधर, अमृतसर, नई दिल्ली और शकूरबस्ती में शुरू होने जा रहा है। इसके लिए रेलवे ने तैयारी कर ली है। रेलवे के मुताबिक एक स्टेशन की वाशिंग लाइन पर रोजाना पांच ट्रेनों की धुलाई होती है। इससे इन स्टेशनों पर पुराने सिस्टम से ट्रेनों की धुलाई में प्रतिदिन 12 लाख 60 लीटर पानी खर्च हो रहा है। नया प्लांट लगने के बाद यह कार्य सिर्फ 10 हजार 500 लीटर पानी में ही हो जाएगा।
पूरी ट्रेन में पांच मिनट में पानी भरेगा क्विक वाटरिंग सिस्टम
आटोमेटिक कोच वाशिंग सिस्टम के अलावा रेलवे क्विक वाटरिंग सिस्टम भी शुरू करने जा रहा है। रेलवे का दावा है कि यह सिस्टम पूरी ट्रेन में यात्रियों की आवश्यकता के लिए सिर्फ पांच मिनट में पानी भर देगा। प्रति मिनट 100 लीटर पानी ट्रेन की टंकी में भरा जा सकेगा। इससे पानी की बर्बादी नहीं होगी और कम समय में ज्यादा ट्रेनों में पानी भरा जा सकेगा। शुरूआत में मुरादाबाद, बरेली, अंबाला, नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, लुधियाना, लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में यह सिस्टम लगाया जाएगा।
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पानी की खपत को कम करने के लिए आटोमेटिक कोच वाशिंग सिस्टम उत्तर रेलवे के छह स्टेशनों पर लगाए जाएंगे। पुनर्चक्रण के माध्यम से पानी को दोबारा प्रयोग किया जा सकेगा। एक ट्रेन की धुलाई में खर्च होने वाले पानी की खपत छह गुना तक कम हो जाएगी। प्लान तैयार है जल्द ही इस पर कार्य शुरू किया जाएगा।
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- रेखा शर्मा, सीनियर डीसीएम
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