तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे बीएसए कांता प्रसाद के खिलाफ शिक्षकों के बाद अब उनके स्टाफ ने भी मोर्चा खोल दिया है। बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों ने गुरुवार को बीएसए पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी की।
कर्मचारियों का कहना है कि ट्रांसफर - पोस्टिंग कर्मचारी नहीं बल्कि अफसर की कलम से होते हैं। लिहाजा सजा कर्मचारियों को नहीं अफसर को मिलनी चाहिए। कर्मचारी एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अफसरों की करनी की सजा कर्मचारियों को मिली तो कर्मचारी आंदोलन करेंगे।
यूपी एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफिसर्स एसोसिएशन ने गुरुवार को डीआईओएस आफिस स्थित शिक्षा भवन में बैठक कर बीएसए आफिस से दो बाबुओं को हटाए जाने की निंदा की। बैठक में एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संजय चौहान ने कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी कांता प्रसाद द्वारा ट्रांसफर और पदोनति में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
एसोसिएशन इसकी निंदा करती है और उनके खिलाफ जांच की मांग करती है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बीएसए की करनी की सजा उनके स्टेनो संदीप कुमार और सैय्यद आसिफ हुसैन को भुगतनी पड़ रही है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कर्मचारी के दस्तखत से कुछ नहीं होता। ट्रांसफर - पोस्टिंग करना बीएसए का अधिकार है और तबादलों में जो भी भ्रष्टाचार हुआ है उसकी सजा कर्मचारियों के बजाए बीएसए को ही मिलनी चाहिए। कर्मचारियों ने बीएसए के खिलाफ नारेबाजी भी की।
नौबत यहां तक आ गई कि अपने ही कर्मचारियों को अपने खिलाफ बगावत पर उतरा देख बीएसए ज्यादा देर आफिस में नहीं बैठ सके। कर्मचारियों की बैठक में मंडलीय अध्यक्ष अतुल रस्तोगी, शरद कपूर, विजय पाल सिंह भंडारी, राजेंद्र मोहन शर्मा, रानू शर्मा, अजय अग्रवाल, प्रदीप बहुखंडी, मनुराज शर्मा, सुनील शर्मा, रहे।
बीएसए कांता प्रसाद ने बताया कि मेरे ऊपर लग रहे आरोप बेबुनियाद हैं। प्रमोशन से लेकर ट्रांसफर तक की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और नियम - कानून के तहत ही सारे काम किए जा रहे हैं।