मुरादाबाद। एक फरवरी को संसद में पेश होने वाले बजट से कर अधिवक्ताओं को जीएसटी एक्ट और आयकर में सुधार की उम्मीद है। कर अधिवक्ता से लेकर व्यवसायी तक जीएसटी एक्ट को लेकर काफी परेशान हैं।
कर अधिवक्ताओं का कहना है कि जीएसटी में लिमिटेशन एक्ट को शामिल किया जाना बहुत जरूरी है। जीएसटी में व्यापारी को प्रथम अपील फाइल करने के लिए तीन माह का समय दिया जाता है। यदि व्यापारी तीन माह में अपील नहीं कर पाता है तो एक महीने की अपील फाइल करने की देरी प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा माफ की जा सकती है। यदि अपील फाइल करने में एक माह से अधिक की देरी है तो करदाताओं की परेशानी बहुत बढ़ जाती है। देरी को माफ कराने के लिए हाई कोर्ट जाना पड़ता है। क्योंकि प्रथम अपीलीय अधिकारी एक माह से अधिक की अपील फाइल करने की देरी माफ नहीं कर सकते हैं। इस वजह से जीएसटी में लिमिटेशन एक्ट का शामिल किया जाना आवश्यक है।
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केंद्र सरकार को बजट में आईटीआर यू भरने पर आयकर रिफंड देने की व्यवस्था करनी चाहिए। अभी आईटीआई यू भरने पर टैक्स,ब्याज,लेट फीस, अतिरिक्त कर भुगतना पड़ता है लेकिन रिफंड नहीं मिलता है। इस वजह से करदाताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी प्रकार जीएसटी में बदलाव जरूरी है। - सुरेश चंद्र गुप्ता वरिष्ठ अधिवक्ता जीएसटी एंड इनकम टैक्स
- बजट में 80 सी में निवेश की सीमा एक दशक से डेढ़ लाख है। इस सीमा को बढ़ाकर तीन लाख करना चाहिए। इस सीमा के बढ़ने की प्रतिवर्ष उम्मीद लगाई जाती है। इसी प्रकार जीएसटी एक्ट में बदलाव होना चाहिए ताकि ईमानदार कारोबारी को परेशानी न उठाना पड़े।
गगन वार्ष्णेय, अधिवक्ता जीएसटी एंड इन्कम टैक्स
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जिन आयकर करदाताओं का ऑडिट नहीं होता है। उन करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि प्रति वर्ष 31 जुलाई होती है। ऐसे करदाताओं की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। अंतिम दिनों के आयकर की साइट पर लोड बढ़ जाता है। समय पर रिटर्न फाइल न होने पर उन्हें लेट फीस भी देनी पढ़ती है। जिससे करदाताओं का शोषण होता है अतः बजट में जिन करदाताओं का ऑडिट नहीं होता है उनके लिए आयकर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि प्रतिवर्ष 31 जुलाई के स्थान पर 31 अगस्त होनी चाहिए। - सौरभ कपूर, अधिवक्ता जीएसटी एंड इनकम टैक्स
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जीएसटी में लिमिटेशन एक्ट का शामिल किया जाना आवश्यक है। वहीं आयकर में बहुत बड़ी संख्या में आयकर अपीलें लंबित है जिनका निस्तारण बहुत समय से नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त बहुत सारी आयकर की अपील देर से फाइल होती है। इस कारण सीआईटी अपील देर से फाइल होने वाली अपीलों को रिजेक्ट कर देते हैं। सरकार को इस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए।
- गौरव गुप्ता, अधिवक्ता जीएसटी एंड इनकम टैक्स
जीएसटी में फर्जी व्यापारी चेन सप्लाई से इनपुट टैक्स क्रेडिट में धोखाधड़ी बढ़ती जा रही है। इसमें कई बार ईमानदार करदाता भी फर्जी व्यापारियों से खरीदारी कर फंस जाते हैं। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी होगी, जिससे फर्जी व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन न मिल सके। साथ ही ईमानदार करदाताओं को कोई परेशानी न हो सके।
- दीपक अग्रवाल, अधिवक्ता जीएसटी एंड आयकर