अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ की घोषणा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का उल्लंघन है। अमेरिका ने पहले भी नियमों का उल्लंघन किया है, लेकिन इस बार पैमाना बड़ा है। विश्व व्यापार संगठन के जन्म के साथ ही, हर देश द्वारा लगाए जा सकने वाले आयात शुल्क निर्धारित किए गए थे।
मामले में भारत द्वारा लगाया जा सकने वाला बाउंड टैरिफ औसतन 50.8 प्रतिशत है। जबकि, भारत लगभग छह प्रतिशत का औसत भारित आयात शुल्क लगा रहा है, जो ‘बाउंड टैरिफ’ से बहुत कम है। यह बात स्वदेशी जागरण मंच के कार्यक्रम में अखिल भारतीय संगठन मंत्री कश्मीरी लाल ने कही। एमआईटी में आयोजित कार्यक्रम में वह बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की यह शिकायत कि भारत अमेरिका से आने वाले माल पर अधिक शुल्क लगाता है, वैध शिकायत नहीं है। विश्व व्यापार संगठन शक्तिशाली संगठन रहा है और इसमें किए गए समझौते कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं। ऐसे में अमेरिका द्वारा एकतरफा टैरिफ की घोषणा डब्ल्यूटीओ के खत्म होने का संकेत है।
भारत द्वारा रॉयल्टी व्यय, जो 1990 के दशक में एक बिलियन अमेरिकी डॉलर से भी कम था, अब सालाना 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। डब्ल्यूटीओ और इसकी तथाकथित नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के कारण भारत, चीन द्वारा डंपिंग और चीनी सरकार द्वारा अनुचित सब्सिडी और चीन जैसी गैर-बाजार अर्थव्यवस्था को भी एमएफएन का दर्जा देने की बाध्यता जैसी अनुचित व्यापार प्रथाओं का शिकार रहा है। कश्मीरी लाल ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर निधि संग्रह अभियान एवं संगठन के विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम में डॉ. राजीव कुमार, डॉ. एके अग्रवाल, कुलदीप सिंह, कपिल नारंग, प्रशांत शर्मा, हिमांशु मेहरा, पूनम चौहान आदि मौजूद रहे।