फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खराब स्वेटरों के सप्लायरों को बचाने की कवायद में शिक्षकों पर फोड़ा ठीकरा, तीन को किया निलंबित

Thu, 31 Dec 2020 02:50 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद
विज्ञापन
बच्चों को स्वेटर देते शिक्षक (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

प्राइमरी पाठशाला के बच्चों को खराब गुणवत्ता के स्वेटर सप्लाई करने वालों को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। इन पर मात्र दो प्रतिशत ही पेनाल्टी लगी। हैरतअंगेज तरीके से स्वेटर बांटने में लेट लतीफी का आरोप लगाते हुए दी गई समयावधि से पहले ही तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया और सात का वेतन रोक दिया गया। इससे शिक्षकों में उबाल है और शिक्षक संघ ने कहा है कि यह गलत है। सप्लायरों को प्रतिबंधित करना चाहिए और शिक्षकों का निलंबन वापस होना चाहिए। क्योंकि शिक्षकों ने तो स्वेटर बांट दिए थे पर सप्लायर ने साइज ठीक नहीं दिए और अभिभावकों ने उन्हें लौटा दिया।

विज्ञापन


यह है पूरा प्रकरण

बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत एक लाख 66 हजार 862 विद्यार्थियों को निशुल्क स्वेटर वितरण किया जा रहा है। भगतपुर टांडा, मूंढापांडे और मुरादाबाद ब्लाक में 58347 बच्चों को बोधराज सुभाषचंद्र एसोसिएट्स फर्म की ओर से स्वेटर वितरित किए गए। इस फर्म ने 158 रुपये प्रति स्वेटर की दर सेे 92 लाख 18 हजार 826 रुपये स्वेटरों की आपूर्ति की। एसडीएम सदर प्रेरणा सिंह जांच में यह साबित हो गया कि स्वेटरों के जो सैंपल दिखाए गए थे, उससे खराब गुणवत्ता के स्वेटर सप्लाई किए गए। इस पर उन्होंने इस फर्म पर दो प्रतिशत यानी एक लाख 84 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।

उन पर मात्र दो प्रतिशत पेनाल्टी और सजा शिक्षकों को, घोटाले से भटका रहे ध्यान

शिक्षकों का कहना है कि जांच में यह तो साबित कर दिया गया कि स्वेटरों की गुणवत्ता खराब है पर सप्लायरों को बचाने की कोशिश की गई है। मात्र दो प्रतिशत की ही पेनाल्टी लगाई गई है। उधर कोरोना संक्रमण काल में घर-घर जाकर बच्चों को स्वेटर बांट चुके शिक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करना बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दोहरा रवैया है। यह दरअसल स्वेटरों की गुणवत्ता के घोटाले से ध्यान भटकाने की कोशिश है ताकि उन्हें बचाया जा सके।
विज्ञापन


साइज का भी किया गया है खेल

शिक्षकों के निलंबन के बाद अब यह सामने आ रहा है कि न केवल गुणवत्ता बल्कि स्वेटरों के साइज में भी खेल किया गया है। निलंबित किए गए प्राथमिक विद्यालय मिलक मुकरिबपुर के प्रधानाध्यापक वसीम मसरूर खान का कहना है कि स्वेटर वितरण के लिए करीब दस दिन पहले ही स्कूल में आए थे। विद्यालय में अध्ययनरत 323 बच्चों को स्वेटर बांट दिए गए थे। खंड शिक्षा अधिकारी को स्कूल में मिले 14 स्वेटर अभिभावकों ने साइज बदलवाने के लिए भेजे थे। वह आकस्मिक अवकाश पर थे, जिसकी वजह से बच्चों को वह स्वेटर नहीं बदलवा पाए थे।

उनका आरोप है कि शत-प्रतिशत स्वेटर वितरण के लिए खंड शिक्षा अधिकारी ने मंगलवार दोपहर तक का समय दिया था। इस समय तक वे इन्हें किसी भी तरीके से बांट देते पर बीएसए ने एक दिन पहले ही उन्हें निलंबित कर दिया गया। यह केवल वसीम मसरूर का ही नहीं कहना है बल्कि अन्य शिक्षकों एवं अभिभावकों का भी कहना है कि स्वेटरों केसाइज में फर्क आया है। इसकी भी गहराई से जांच हो और बड़ा खुलासा हो जाएगा।

गुणवत्ता पर वितरण से पहले ही उठे थे सवाल, निलंबन वापस नहीं हुआ तो विरोध दर्ज करेंगे: राकेश कौशिक

शिक्षकों ने कोरोना संक्रमण काल के बावजूद बच्चों को घर-घर जाकर स्वेटर वितरित किए गए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई यह कार्रवाई गलत है। स्वेटर वितरण से पहले ही उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठे थे। इसके बावजूद घटिया गुणवत्ता के स्वेटर वितरित किए गए। बीएसए को शिक्षकों का निलंबन वापस लेकर घटिया गुणवत्ता के स्वेटर वितरित करने वाली फर्म को प्रतिबंधित करना चाहिए अन्यथा हम इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करेंगे- राकेश कौशिक, महानगर अध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ

डीएम हैं अध्यक्ष, वहीं देंगे जवाब: बीएसए

स्वेटरों की आपूर्ति करने वाली फर्म का क्या करना है यह तो समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी ही बता सकते हैं। वही जवाब देंगे। इसके अलावा स्कूलों में एक महीने से स्वेटर रखे थे, शिक्षकों को उनका वितरण करना चाहिए था। शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता का काम पूरा करने केबाद ही शिक्षकों को अवकाश पर जाना चाहिए था। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। - योगेंद्र कुमार, बीएसए एवं सदस्य सचिव समिति

स्वेटर प्रयोगशाला में भिजवा रहा हूं, अधोमानक मिले तो ब्लैकलिस्टेड होंगे सप्लायर: डीएम

डीएम राकेश कुमार सिंह ने कहा कि बच्चों को बांटे गए इन स्वेटरों के नमूने मैने प्रयोगशाला में भिजवाने के निर्देश दे दिए हैं। एसडीएम की कार्रवाई तो सही है पर इसकी तकनीकी जांच होना बेहद जरूरी है। स्वेटरों में धागा कैसा लगा है, ऊन की गुणवत्ता कैसी है इन सभी का पता लैब में चलेगा। यदि ये स्वेटर अधोमानक पाए गए तो सप्लायर फर्मों को अपने यहां ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। सरकार से भी सिफारिश की जाएगी कि जैम पोर्टल पर भी ऐसी फर्मों का लाइसेंस निरस्त किया जाए। इस समिति का अध्यक्ष मैं ही हूं पर मैने वितरण समिति का अध्यक्ष सीडीओ को बनाया था। उन्हें पूरी जांच को कहा है। शिक्षकों के निलंबन के मामले में मैने पूरी तरह से पेशवा बाजीराव की नीति अपनाई है। जो काम नहीं करेगा उस पर तत्काल एक्शन होगा। सर्दी बच्चों को स्वेटर समय से बंटने चाहिए थे 

यह गड़बड़झाला है, सीएम को भेज रहा हूं पूरी जानकारी: डा. विशेष गुप्ता

यह बेहद गंभीर बात है कि सर्दी में बच्चों को घटिया गुणवत्ता केस्वेटर सप्लाई कर दिए। मैं इस बारे में जिलाधिकारी को पत्र भेज रहा हूं कि पूरी जांच कर कार्रवाई की जाए। इसके बारे में मुख्यमंत्री को भी अवगत करा रहा हूं ताकि ऐसी फर्मो पर सख्त कार्रवाई की जाए- डा. विशेष गुप्ता, अध्यक्ष राज्य बाल संरक्षण आयोग

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें