मंडल की दस चीनी मिलें नोकेन में पहुंच गईं हैं। इन मिलों को क्षमता के मुताबिक गन्ना नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा आधा आधा दिन के लिए चीनी मिलें बंद हो जाती हैं। जब मिल में गन्ना इकट्ठा हो जाता है तो मिलों को शुरू किया जाता है। मंडल में इक्कीस चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खरीद की जा रही है। नवंबर से पेराई सत्र शुरू हुआ था। अब पेराई सत्र सिमटने लगा है। रजपुरा, करीमगंज, बिलारी, बेलवाड़ा, मिलक नारायणपुर, रानीनांगल, चंदनपुर. असमौली और अगवानपुर चीनी मिल के सामने नोकेन की स्थिति बन गई है।
न मिलों को क्षमता के मुताबिक गन्ना मिल ही नहीं पा रहा है। अगर किसी चीनी मिल की क्षमता अस्सी हजार कुंतल की है तो उसे चालीस हजार कुंतल गन्ना ही मिल पा रहा है। अब गन्ने के लिए मिल को बंद कर दिया जाता है। डिप्टी केन कमिश्नर ने बताया कि मंडल की दस चीनी मिलें नोकेन में पहुंच गईं हैं। कई दूसरी मिलों के सामने भी गन्ने का संकट खड़ा हो गया है। चार चीनी मिलों ने तो पेराई सत्र समाप्त करने की तैयारी कर ली है।
माना जा रहा है कि होली के बाद करीब दस चीनी मिलें पेराई सत्र को समाप्त कर देंगी। वहीं प्रशासन ने भी शुगर लॉबी पर गन्ना भुगतान के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। मिल प्रबंधकों से कहा गया है कि बंदी से पहले किसानों का पेमेंट कर दिया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं शासन ने भी सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देशित कर दिया है। डीएम से कहा गया है कि वह मिल वालों के साथ मीटिंग करके पेमेंट की नियमित समीक्षा करते रहें।