फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गन्ना बकाया पर ब्याज देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। चीनी मिलों को किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन के अंदर करना चाहिए। यदि तय अवधि में मिलें भुगतान करने में नाकाम रहती हैं तो उन्हें किसानों को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से किसानों को बकाया मूल्य पर ब्याज भी देना होगा। राज्य सरकारें चाहें तो इस एक्ट के तहत शुगर मिलों को ब्याज देने के लिए बाध्य कर सकती हैं। लेकिन शुगर लॉबी के दबाव में कोई भी सरकार इसे लागू करने में नाकाम रही है। भाकियू नेता के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र पर केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने जवाब भेजा है कि इस एक्ट को लागू करने की शक्तियां राज्य सरकारों में निहित हैं।
विज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के वरिष्ठ मंडल उपाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर कहा था कि जब सरकार किसानों को बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज नहीं दिला सकती तो उसे किसानों से क्रेडिट कार्ड पर ब्याज वसूलने का भी कोई हक नहीं है। इसके अलावा भाकियू नेता ने गन्ना की लागत 300 रुपये प्रति क्विंटल बताते हुए गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की थी। इस ज्ञापन को तत्कालीन मंडलायुक्त अनिल राजकुमार ने 15 नवंबर 2018 को फारवर्ड किया था। इस पत्र के जवाब में भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अवर सचिव नितेश भसीन ने कहा है कि 14 दिन में भुगतान नहीं होने पर गन्ना किसानों को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का नियम गन्ना एक्ट में है। लेकिन इन प्रावधानों को लागू करने की शक्तियां राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन में निहित हैं। अवर सचिव ने कहा है कि केंद्र सरकार समय - समय पर राज्य सरकारों को निर्देश देती रहती है कि वह गन्ना मूल्य का भुगतान समय से कराए और देरी करने वाली मिलों पर सख्त कार्रवाई करे। भाकियू नेता का कहना है कि यह अहम मुद्दा है। केंद्र सरकार ने टालमटोल वाला जवाब दिया है। किसान इस पर खामोश नहीं बैठेंगे और बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज हासिल करने के लिए आंदोलन करेंगे। भाकियू नेताओं का कहना है कि जब गन्ना एक्ट में किसानों को ब्याज देने का स्पष्ट प्रावधान है तो फिर राज्य सरकार शुगर मिल मालिकों का पक्ष क्यों ले रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें