प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालने की अपील की। साथ ही कहा कि सरकार को शिक्षा के मंदिर को बचाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। चेतावनी भरे लहजे में छात्र-छात्राओं ने कहा कि जब तक यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश वापस नहीं लिया जाता या मामले का सकारात्मक समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं और उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि अपनी शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित रखना है। उन्होंने सभी छात्रों से एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत बनाने और प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शिक्षा हित में निर्णय लेने की मांग की। इस आंदोलन में जौहर यूनिवर्सिटी के कुछ पूर्व छात्र-छात्राएं भी शिरकत कर रहे हैं। रविवार रात तक भी सभी धरना स्थल पर डटे थे।
छात्राओं की तादाद देख बढ़ाई महिला पुलिस
रविवार को बारिश के बावजूद विद्यार्थियों का जौहर यूनिवर्सिटी के गेट पर धरना जारी रखने से वहां पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। रामपुर के अजीमनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित यूनिवर्सिटी के गेट पर थाने की पुलिस के अलावा ठीकठाक संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद रहीं। उनकी तैनाती धरने में छात्राओं की बढ़ी संख्या को देखते हुए की गई है।
विकास प्राधिकरण से जारी हुआ है ध्वस्तीकरण का आदेश
जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों का निर्माण बिना नक्शा स्वीकृत कराए जाने के आरोप में रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की ओर से ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया है। यह आदेश डीएम एवं आरडीए के वीसी अजय कुमार द्विवेदी ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन का पूरा पक्ष सुनने के बाद 15 जुलाई को दिया था। इसके बाद से यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज है।