परिषदीय विद्यालयों में सरकार मिड डे मील में दूध और फल शामिल कर बच्चों को आकर्षित कर रही है। जबकि साल दर साल परिषदीय विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मुरादाबाद में सत्र 2016-17 में पिछले सत्र की तुलना में छह हजार से अधिक विद्यार्थी कम हो गए। यह संख्या हर साल गिर रही है। जबकि विद्यालयों में पंजीकरण के लिए सरकार ने शिक्षकों को घर घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी दे रखी है। सरकारी विद्यालय
वर्ष 2016-17 का शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत में अध्यापकों को स्कूल चलो अभियान के तहत छात्र छात्राओं का पंजीकरण बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई। अध्यापकों ने स्कूलों आने वाले विद्यार्थियों के साथ रैली भी निकाली, विद्यालयों में पंजीकरण मेलों का आयोजन किया गया। जिसमें जिलाधिकारी से लेकर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को मौजूद रहने के आदेश दिए गए। इसके बावजूद छात्र छात्राओं की संख्या बढ़ने के बजाय घट गई।
19 मई से ग्रीष्मावकाश शुरू हुआ। दो जुलाई से स्कूल फिर से खुल गए। स्कूल खुलने के साथ ही फिर से पंजीकरण बढ़ाने के लिए अभियान शुरू किया जा रहा है। अप्रैल और मई में हुए पंजीकरण के अनुसार मुरादाबाद जनपद के सभी परिषदीय विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या दो लाख आठ हजार 859 है। जबकि सत्र 2015।16 में विद्यार्थियों की संख्या दो लाख 15 हजार 517 थी। सत्र 2015-16 में सत्र 2014-15 की तुलना में नौ हजार से अधिक विद्यार्थी घट गए थे।
इसी प्रकार से सत्र 2014-15 में सत्र 2013-14 की तुलना में छात्र छात्राओं की संख्या में 14 हजार की गिरावट दर्ज की गई थी। जिसमें नौ हजार छात्राएं शामिल थीं। किताबों का कर रहे इंतजार मुरादाबाद। वर्ष 2016-17 एक अप्रैल से शुरू हो गया। एक अप्रैल से 19 मई तक कक्षाएं चलीं। इस डेढ़ महीने से अधिक के समय में विद्यार्थी बिना किताबों के ही पढ़ाई करते रहे। एक महीना 12 दिन के अवकाश के बाद फिर से स्कूल खुल गए हैं।
लेकिन अभी तक उन्हें मिलने वाली निशुल्क किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। जबकि शासन ने हर हाल में तीस जुलाई तक पुस्तकें विद्यार्थियों तक पहुंचाने का आदेश जारी कर दिया है। लेकिन हालात ये है कि अभी तक पुस्तकों की छपाई के लिए टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हुई है। किताबों की जगह मिल रहे केले मुरादाबाद। मुख्यमंत्री के आदेश पर चार जुलाई से विद्यार्थियों को मिड डे मील में फलों की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई।
सप्ताह में एक दिन बच्चों को फल दिए जाएंगे। लेकिन बिना किताबों के ही स्कूल जाकर बच्चे केवल फल खाने का इंतजार करेंगे। जबकि उनकी पहली जरूरत किताबें हैं। ड्रेस का भी अता पता नहीं मुरादाबाद। परिषदी विद्यालयों में दी जाने वाली निशुल्क ड्रेस का भी कोई अता पता नहीं है। हालांकि जुलाई में ही ड्रेस वितरण का कार्य पूरा करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक बजट ही उपलब्ध नहीं कराया गया है।