मुरादाबाद में छात्र ने सुसाइड नोट लिखने और अपने बड़े भाई को मेसेज करने के बाद फंदे पर लटक कर जान दे दी। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंच जांच पड़ताल की।
परिवार के सपनों पर खरा नहीं उतरा सकता...अब जीने का मन नहीं करता। त्वचा की बीमारी से ग्रस्त हूं और बाल झड़ने लगे हैं। मात्र 20 साल के छात्र आशुतोष शुक्ला ने मंगलवार की रात सुसाइड नोट लिखने और अपने बड़े भाई को मेसेज करने के बाद रामगंगा विहार में किराये के मकान में फंदे पर लटक कर जान दे दी। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंच जांच पड़ताल की। बुधवार शाम आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लटकने से मौत होने की पुष्टि हुई है।
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एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह ने बताया कि हरदोई जिले के शाहाबाद थाना क्षेत्र के घोली कला निवासी किसान जय प्रकाश शुक्ला का छोटा बेटा आशुतोष सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट में आंखों से संबंधित कोर्स कर रहा था। वह सिविल लाइंस के रामगंगा विहार में किराये के मकान में करीब दो साल से रहता था।
मंगलवार की रात उसने अपने बड़े भाई आकाश शुक्ला को कई मेसेज किए। जिसमें उसने अपने लैपटॉप, मोबाइल का पासवर्ड, डेबिट कार्ड का पिन और अन्य जानकारियां अपने भाई को साझा कीं। देर रात करीब तीन बजे आकाश ने मेसेज पढ़े तो उसके होश उड़ गए। उसने आशुतोष शुक्ला को कॉल की लेकिन उसका नंबर ही रिसीव नहीं हुआ।
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इसके बाद आकाश ने आशुतोष के दोस्त सूरज को कॉल की। सूरज मौके पर पहुंचा तो आशुतोष का दरवाजा अंदर से बंद था। उसने खिड़की का दरवाजा तोड़ दिया और अंदर घुस गया। तब उसने देखा कि आशुतोष रस्सी के सहारे फंदे से लटका हुआ था। उसने इसकी जानकारी अपने अन्य साथियों और पुलिस को दी।
पुलिस मौके पर पहुंच गई। रस्सी काटकर आशुतोष नीचे उतारा गया और जिंदगी की आस में उसे जिला अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस और फोरेंसिक की टीम ने कमरे की जांच पड़ताल की। यहां दो पन्ने का एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें आशुतोष ने अपने जीवन से जुड़े कई पहलुओं को शेयर किया है। एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजन शव लेकर चले गए हैं।
अब किसी चीज में मन नहीं लगता... माफ करना मां
मुरादाबाद में बीएससी इन ऑप्टोमेट्री के छात्र आशुतोष शुक्ला की मौत के बाद सामने आए सुसाइड नोट ने उसके भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष को सामने ला दिया। नोट में आशुतोष ने जिंदगी से मोहभंग, किसी चीज में मन न लगने और सब कुछ अस्थायी लगने की बात कही है। उसने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया और इसे अपनी जिंदगी और अपनी पसंद बताया।
सुसाइड नोट में आशुतोष ने लिखा कि इन दिनों उसका इस जिंदगी में मन नहीं लगता। उसे लगता है कि कुछ भी उसका अपना नहीं है और सब कुछ उससे दूर हो जाने से पहले ही छिन जाता है। उसने लिखा कि उसका हर जगह से इंटरेस्ट खत्म हो गया है। उसने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न मानने की बात भी लिखी।
सुसाइड नोट में उसने अपने परिवार के लिए कई बातें लिखीं। परिवार के सपनों पर खरा नहीं उतरा, अब जीने का मन नहीं करता। उसकी मौत के बाद मोबाइल और सिम नष्ट कर दिया जाए या उसके साथ रख दिया जाए। छात्र ने लिखा कि उसने मोबाइल का सारा डाटा और बैंक एकाउंट खत्म कर दिए हैं। नोट में उसने कहा कि वह सिर्फ शांति चाहता है और मौत के बाद भूत बनकर किसी को परेशान नहीं करना चाहता।
सबसे भावुक हिस्सा वह है, जिसमें आशुतोष ने अपनी मां और भाई से विशेष रूप से माफी मांगी है। उसने अपने एक खास दोस्त से भी माफी मांगने की बात लिखी। इसके साथ ही उसने परिवार को अपनी कुछ निजी चीजों के बारे में जानकारी दी। उसने लैपटॉप का पासवर्ड की जानकारी भी दी है।
टिफिन वाले राजा भैया के 2580 रुपये बकाया
छात्र आशुतोष शुक्ला ने सुसाइड नोट में अपने भाई के लिए आगे लिखा है कि टिफिन वाले भैया के 41 टिफिन हो गए हैं। आज के दो टिफिन लगाकर 43 हो गए हैं। 2580 रुपये राजा भैया के उधार हैं। बिजली बिल के 500 रुपये भी नोट में लिखे हैं। नोट की भाषा से साफ है कि आशुतोष लंबे समय से भीतर ही भीतर परेशान था हालांकि, उसकी मौत के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।