मुरादाबाद। पश्चिम एशियाई युद्ध से बिगड़े हालात से उबर रहे निर्यातकों को अब डॉलर और रुपये की जंग झटका दे रही है। डॉलर के लगातार उछाल से विदेशी ग्राहकों को भारतीय उत्पाद खरीदना महंगा लग रहा है। वे कीमतों में छूट की मांग कर रहे हैं। कच्चे माल की महंगाई और अन्य बढ़े खर्चों के कारण निर्यातकों के छूट से इन्कार पर सौदे नहीं हो पा रहे हैं।
कभी डॉलर की मजबूती से हस्तशिल्प उत्पादों के बदले विदेशी मुद्रा में मिलने वाला मोटा भुगतान निर्यातकों को भाता था लेकिन अब यह उनकी चिंता का कारण बन गया है। डॉलर से हस्तशिल्प खरीदने वाले विदेशियों को भारतीय उत्पादों की कीमतें ज्यादा लग रही हैं। वे ऑर्डर करने से पहले कीमतों पर 10 से 15 प्रतिशत की छूट मांग रहे हैं। दूसरी ओर कच्चे माल की महंगाई, पैकेजिंग, परिवहन जैसे खर्च बढ़ने से निर्यातक कीमतों में छूट देने की स्थिति में नहीं हैं। निर्यातकों ने बताया कि इन स्थितियों से ऑर्डर तय करते समय बनते-बनते बात बिगड़ जा रही है।
ईपीसीएच के सीओए सदस्य नावेद उर रहमान का कहना है कि डॉलर के लगातार मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हस्तशिल्प उत्पाद की कीमतों पर अनिश्चितता बनी हुई है। कई विदेशी खरीदार बड़े ऑर्डर फाइनल करने से बच रहे हैं। कुछ विदेशी ग्राहक छूट की मांग भी कर रहे हैं।
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फरवरी से मई तक यूं बढ़ा डॉलर
-फरवरी-90.65 रुपये प्रति डॉलर
-मार्च-91.82 रुपये प्रति डॉलर
-अप्रैल-92.82 रुपये प्रति डॉलर
-मई-94.85 रुपये प्रति डॉलर
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सामान्य तौर पर डॉलर की मजबूती से विदेशों से आने वाला भुगतान लाभ देता है लेकिन डॉलर में हस्तशिल्प खरीदने वाले विदेशियों को सौदे महंगे लग रहे हैं। विदेशी खरीदार कीमतों में छूट मांग रहे हैं। इस बीच अपने देश में कच्चे माल, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से निर्यात उत्पाद तैयार करने में ज्यादा लागत आ रही है। लिहाजा डील फाइनल नहीं हो पा रहीं। - लव वाधवा, निर्यातक
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विदेशों से ऑर्डर लेने में इन दिनों काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विदेशी खरीदार 10 से 15 प्रतिशत छूट की मांग कर रहे हैं। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से हस्तशिल्प उत्पादों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इसलिए छूट देना संभव नहीं हो पा रहा है। एक महीने में 15 से 20 विदेशी खरीदारों ने फोन पर उत्पाद महंगे बताकर ऑर्डर नहीं दिए। - नरेंद्र चौधरी, निर्यातक
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पिछले एक सप्ताह में 10 ऐसे खरीदारों से बात हुई जिन्होंने ऑर्डर इसलिए नहीं दिए, क्योंकि उनकी मांग के अनुसार कीमतों पर छूट नहीं दी गई। रुपये के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने से खरीदारों के लिए हस्तशिल्प उत्पाद महंगे लग रहे हैं। भारतीय निर्यातकों को महंगे कच्चे माल के कारण उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। लागत ज्यादा आने से उत्पादों की कीमतों पर छूट संभव नहीं है। - विवेक अग्रवाल, वाइस चेयरमैन, यस