मुरादाबाद। बैंकों के विलय के विरोध में मंगलवार को बैंक कर्मचारियों ने क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद बैंक पर धरना-प्रदर्शन किया। मांगें न मानने के कारण उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पदाधिकारियों का कहना है कि हड़ताल की वजह से करीब पांच सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। हालांकि बैंकों में अधिकारियों ने विरोध स्वरूप बैज लगाकर कार्य किया।
आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन एवं बैंक इंप्लाइज फेडरेशन आफ इंडिया के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार इलाहाबाद बैंक, आंध्रा बैंक, सिंडीकेट बैंक, कारपोरेशन बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक में कर रही है। इनमें से छह बैंकों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। विलय के बाद शाखाओं की बंदी होगी, जिससे ग्राहकों को परेशानी होगी। उन्होंने बैंकों का विस्तार करने की मांग की। कहा कि दस बैंकों का एनपीए 31 मार्च 2019 तक 3,16,632 करोड़ रुपये था, जिसकी वसूली नहीं हो पाएगी। यह और अधिक बढ़ जाएगा। इससे पहले अन्य बैंकों के विलय के बाद एनपीए बढ़ा है। कार्यालय सचिव यूपीबीईयू मुरादाबाद इकाई मनोज शर्मा ने कहा कि हड़ताल में एसबीआई और प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक शामिल नहीं हुआ है। बैंकों में कैश की ड्यूल चाबी होती है जो अधिकारी और कर्मचारी साथ मिलकर प्रयोग करते हैं। कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण कैश संबंधी कार्य नहीं हो पाया। बैंकों में क्लीयरिंग, आरटीजीएस, निफ्ट का कार्य रुका रहा। प्रतिदिन करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की क्लीयरिंग होती है, जबकि सवा सौ करोड़ रुपये का कैश का लेनदेन होता है। उन्होंने कहा कि बाहर जाने वाली धनराशि रुक गई है। इस दौरान जिला सचिव एसपी सिंह, जिला अध्यक्ष नवनीत कुमार, करन सिंह, कौशल कुमार, वेद प्रकाश, आशू चौधरी, मुशर्रफ, मनोज टंडन, पुष्पेेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
काम नहीं होने पर लौटे ग्राहक
हड़ताल की जानकारी नहीं होने की वजह से ग्राहकों ने बैंकों की ओर रुख किया, लेकिन वहां पर उन्हें बैंकों में हड़ताल की वजह से कार्य नहीं होने के नोटिस लगे हुए थे। कर्मचारियों के नहीं होने पर काम भी ठप रहा था। इसके कारण ग्राहकों को वापस लौटना पड़ा।